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शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017

3:31 am

अगली मुलाकात येरुशलम में होगी


मार्कण्डेय पाण्डेय
अगली मुलाकात येरुशलम में होगी। हजार साल तक अपने देश के लिए जूझते यहूदी जब आपस में मिलते तो गुडबाय, अथवा अलविदा कहने की जगह यही कहा करते थ्ो कि अगली मुलाकात येरुशलम में होगी। येरुशलम को इजरायल की राजधानी का दर्जा दुनियां की बड़ी ताकत ने दे दिया है। यह सिर्फ एक संघर्षरत देश की राजधानी को दी गई मान्यता नहीं है, बल्कि हजार साल के लंबे संघर्ष को दी गई मान्यता है। फिलिस्तीन के विरोध के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टंàप ने इजरायल की राजधानी येरुशलम को मान्यता दे दी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को ऐतिहासिक और साहसी फैसला बताया। नेतन्याहू ने कहा कि यह ऐतिहासिक दिन है। येरुशलम तीन सदियों से हमारी उम्मीदों, हमारे सपनों, हमारी दुआओं के केंद्र में रहा है। यह 3,००० वर्षों से यहूदी लोगों की राजधानी रही है। यहां हमारे पवित्र स्थल हैं, हमारे राजाओं ने शासन किया और हमारे पैंगबरों ने उपदेश दिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले से इजरायल तो खुश है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चिता नजर आ रही है। इसे पश्चिम एशिया में हिसा भड़काने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। वहीं अमेरिका ने ये भी कहा है कि वो अपनी दूतावास तेल अवीव से येरुशलम शिफ्ट करने जा रहा है। फिलहाल इजरायल के तेल अवीव में 86 देशों का दूतावास है। लेकिन येरुशलम पर चल रहे विवाद को लेकर अब तक वहां किसी भी देश का दूतावास नहीं है। उल्लेखनीय है कि 1948 से लेकर अब तक येरुशलम को लेकर फिलिस्तीन और इजरायल के बीच विवाद चल रहा है। साथ ही यूनाइटेड नेशन से लेकर दुनिया के ज्यादातर देश पूरे येरुशलम पर इजरायल के दावे को मान्यता नहीं देते हैं। जबकि इजरायल और फिलिस्तीन दोनों ही येरुशलम को अपनी राजधानी मानते हैं।
क्या है यरुशलम विवाद?
भारत की आजादी के ठीक एक साल बाद ही 1948 में इजरायल ने अपनी आजादी का ऐलान किया था। जिसके ठीक साल भर बाद येरुशलम का बंटवारा हुआ। लेकिन 1967 में 'सिक्स डे वॉर’ के नाम से मशहूर इजरायल और अरब देशों के बीच हुई जंग में इजरायल ने पूर्वी येरुशलम पर कब्जा कर लिया। साल 198० में इजरायल ने येरुशलम को अपनी राजधानी बनाने का ऐलान किया था। लेकिन यूनाइटेड नेशन ने इस का विरोध किया और येरुशलम पर इजरायल के कब्जे की निदा की थी। जिसके बाद से येरुशलम को लेकर फिलिस्तीन और इजरायल लगतार एक दूसरे के आमने-सामने है।
यहूदी, ईसाई और मुसलमान का दावा
तो वहीं दूसरी ओर येरुशलम को यहूदी, ईसाई और मुसलमान तीनों ही अपनी पवित्र जगह मानते हैं। येरुशलम का टेंपल माउंट यहूदियों का सबसे पवित्र जगह है, वहीं मुसलमानों की तीसरी सबसे पाक मस्जिद अल-अक्सा वही मौजूद है। इन सब के अलावा ईसाईयों की सपुखर चर्च भी यहीं पर है।
क्या है येरुशलम का इतिहास
भूमध्य सागर और मृत सागर के बीच इसराइल की सीमा पर बसा येरुशलम एक शानदार शहर है। शहर की सीमा के पास दुनिया का सबसे ज्यादा नमक वाला डेड सी यानी मृत सागर है। कहा जाता है कि यहां के पानी में इतना नमक है कि इसमें किसी भी प्रकार का जीवन नहीं पनप सकता और इसके पानी में मौजूद नमक के कारण इसमें कोई डूबता भी नहीं है। जेरूशलम या येरुशलम बहुत ही प्राचीन शहर है। यहां के सुलेमानी प्राचीन मंदिर के परिसर में अब मस्जिद, चर्च और यहूदियों के स्थान बन गए हैं। यह पहले सिनेगॉग था। 937 ईपू बना यह सिनेगॉग इतना विशाल था कि इसे देखने में पूरा एक दिन लगता था, लेकिन लड़ाइयों ने इसे ध्वस्त कर दिया। अब इस स्थल को 'पवित्र परिसर' कहा जाता है। माना जाता है कि इसे राजा सुलेमान ने बनवाया था। किलेनुमा चहारदीवारी से घिरे पवित्र परिसर में यहूदी प्रार्थना के लिए इकट्ठे होते हैं। यह पवित्र परिसर यरुशलम की ओल्ड सिटी का हिस्सा है। इसराइल के 4 प्रमुख क्षेत्र हैं-तेल अवीव, येरुशलम, हैफा और बीयर शेव। येरुशलम इसराइल का सबसे बड़ा शहर और राजधानी है।
येरुशलम के पास से ही जॉर्डन की सीमा प्रारंभ होती है। इसराइल के तेल अवीव की सीमा भी इससे लगी हुई है। यहां की आधिकारिक भाषा हिब्रू है, लेकिन अरबी और अंग्रेजी अब ज्यादा बोली जाती है। येरुशलम सहित इसराइल के बाशिदे लगभग 75 प्रतिशत यहूदी, 15 प्रतिशत मुस्लिम और 1० प्रतिशत अन्य धर्म को मानने वाले हैं। इसराइल का एक हिस्सा है गाजा पट्टी और रामल्लाह, जहां फिलीस्तीनी मुस्लिम लोग रहते हैं और उन्होंने इसराइल से अलग होने के लिए विद्रोह छेड़ रखा है। ये लोग येरुशलम को इसराइल के कब्जे से मुक्त कराना चाहते हैं।
बाइबिल में 7०० बार येरुशलम का नाम है
हिब्रू में लिखी बाइबिल में इस शहर का नाम 7०० बार आता है। यहूदी और ईसाई मानते हैं कि यही धरती का केंद्र है। राजा दाऊद और सुलेमान के बाद इस स्थान पर बेबीलोनियों तथा ईरानियों का कब्जा रहा फिर इस्लाम के उदय के बाद बहुत काल तक मुसलमानों ने यहां पर राज्य किया। इस दौरान यहूदियों को इस क्षेत्र से कई बार खदेड़ दिया गया। द्बितीय विश्वयुद्ध के बाद इसराइल फिर से यहूदी राष्ट्र बन गया तो येरुशलम को उसकी राजधानी बनाया गया और दुनियाभर के यहूदियों को फिर से यहां बसाया गया। यहूदी दुनिया में कहीं भी हों, यरुशलम की तरफ मुंह करके ही उपासना करते हैं।
इसराइल के सम्राट दाऊद के नाम पर उनके बेटे सुलेमान ने एक नगर बसाया था जिसे सिटी ऑफ डेविड कहा जाता है। ओल्ड सिटी के जियोन गेट या डंग गेट से निकलकर जियोन पहाड़ी पर इस प्राचीन सिटी के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। माना जाता है कि यह लगभग 3,००० वर्ष पुराना शहर है। सोलोमन मंदिर के साथ ही इसे बनाया गया था। पर्यटकों के बीच यह सिटी आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहीं डर्मिशन चर्च के पास उनकी कब्र है। इसी प्रकार वेलिग वॉल को विलाप की दीवार भी कहते हैं। यह यहुदियों का सबसे पवित्र स्थल है। माना जाता है कि यही प्राचीन प्रार्थनालय सोलोमन टेम्पल का परिसर है। इस दीवार के ऊपरी हिस्से में अल-अक्सा मस्जिद स्थित है। यहीं पास में टेम्पल माउंट अर्थात डोम ऑफ द रॉक है। इस दीवार को पश्चिमी दीवार भी कहते हैं।
येरुशलम को इब्रानी में येरुशलयिम और अरबी में अल-कुद्स कहा जाता है। शुरुआत से ही यहूदियों के प्राचीन राज्य इसराइल में यहूदियों के 1० कबीले रहा करते थे। इस शहर में 3 बड़े धर्मों के लोगों के 4 रिहायशी क्षेत्र बने हैं। सुंदर और नक्काशीदार खास चीजों की छोटी दुकान, रोमांचक जायकों की खुशबू फैलाते रेस्तरां, रंग-बिरंगे परिधानों में लोग, नजारों, ध्वनियों और सुगंधों का मिश्रण किसी को भी इस शहर का दीवाना बना सकता है। य्ोरुशलम की अल अक्सा मस्जिद को 'अलहरम-अलशरीफ' के नाम से भी जानते हैं। मुसलमान इसे तीसरा सबसे पवित्र स्थल मानते हैं। उनका विश्वास है कि यहीं से हजरत मुहम्मद जन्नत की तरफ गए थे और अल्लाह का आदेश लेकर पृथ्वी पर लौटे थे।
ईसाइयों के लिए भी यह शहर बहुत महत्व रखता है, क्योंकि यह शहर ईसा मसीह के जीवन के अंतिम भाग का गवाह है। ईसाइयों का विश्वास है कि ईसा एक बार फिर येरुशलम आएंगे। पुराने शहर की दीवारों से सटा एक प्राचीन पवित्र चर्च है जिसके बारे में मान्यता है कि यहीं पर प्रभु यीशु पुन: जी उठे थे। माना यह भी जाता है कि यही ईसा के अंतिम भोज का स्थल है। यह चर्च ईसाई क्वार्टर के इलाके में है।


शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

5:46 am

इजरायल ! इजरायल क्यों हैं ??




मार्कण्डेय पाण्डेय
आई से इजरायल और आई से इन्नोवेशन। यही पहचान है इजरायल की जो दुनियां में जानी जाती है। महज 87 लाख यहूदी लोग और सभी का एक ही लक्ष्य- इजरायल। आप पढाई क्यों करते हैं? उत्तर इजरायल। आप भोजन क्यों करते हैं? उत्तर- इजरायल। आपका लक्ष्य- इजरायल, आपका जीवन संगीत-इजरायल। जीवन का हर काम इजरायल के लिए, सबकुछ इजरायल के लिए। ऐसा देश है- इजरायल। जिसका क्ष्ोत्रफल मात्र 2०,77० वर्ग किलोमीटर है। इसे पाने के लिए यहूदियों ने दो हजार साल तक संघर्ष किया। दो हजार साल पहले उस्मान गणराज्य से लेकर भारत की आजादी के समय तक अनवरत संघर्ष, लगातार उत्पीड़न, अपनी मातृभूमि से निष्कासन, दुनियां भर में भटकाव, जहमत और जलालत फिर भी संघर्ष -अनवरत संघर्ष। भारतीय फांसी के फंदे पर झूलते हुए वंदेमातरम कहते, इजरायली हिब्रू भाषा में कहते अगली मुलाकात येरुशलम में। आखिरकार विप्लवी संघर्ष का अंत हुआ। यहूदियों को दुनियां के नक्श्ो पर भूमि और भूगोल का टुकड़ा हासिल हुआ। अपनी प्रिय मातृभूमि से मिलन हुआ। लेकिन संघर्ष खत्म नहीं हुआ। लगातार दुनियां के आंखों में किरकीरी की तरह इजरायल चुभता रहा, पड़ोसियों के लादे गए युद्ध, आतंक और संघर्ष से जूझता रहा।



इजरायल की सैन्य ताकत, इजरायल के हथियार, इजरायल के कमांडो, इजरायल की खेती और जलसंरक्षण पूरी दुनियां के लिए मिशाल है बल्कि दुनियां के अनेक देशों को चुभते भी हैं। जब भारत आजाद हुआ उसके चार-छह माह बाद इजरायल भी आजाद हुआ। उनकी कुल आबाद में मुसलमान 18 फीसदी, हमारी कुल आबादी में मुसलमान 14 फीसदी, भारत अपने पड़ोसी देशों से परेशान, इजरायल भी पड़ोसियों से परेशान और युद्धरत। लेकिन उनमें और हमारे में फर्क है। उनकी 87 लाख की आबादी में एक भी प्रगतिशील, मानवाधिकारवादी, आतंक का शुभचिंतक नहीं मिलेगा, हमारे यहां हर तबके में ऐसे लोग मिलेगें। वे यहूदी दुश्मनों पर हमला करने में सोचते नहीं, हम सौ बार सोचते हैं। वे राष्ट्रविरोधी तत्वों पर जीरो टालरेंस रखते हैं और हमारे यहां अलगाववादियों के दांत में दर्द भी हो तो दिल्ली में बैठे उनके हमदर्द मास्कों से लेकर बिजिंग तक दवा की पुड़िया लेने चले जाएंगे। बेशर्म इतने कि कहते हैं चेयरमैन माओ, हमारा चेयरमैन। इनके लिए राष्ट्रवाद एक गाली है, देशभक्ति अपशकुन है।
खैर, आईये हम इजरायल पर बात करें। कहा जाता है कि इजरायल के नागरिक युद्धभूमि पर ही निवास करते हैं। भौगोलिक परिस्थितियां अनूकुल नहीं है। उपजाऊ भूमि का अभाव है, पानी का अभाव है। चारों तरफ से अरब देशों से घिरा है और उनसे युद्धरत भी है, इसलिए ईधन कहां से मिले। लेकिन विकट और प्रतिकूल हालात में जीवट की देशभक्ति ने सबकुछ संभव कर दिखाया है। तुर्की, स्वीडन और मलेशिया की तरह इजरायल को भले ही अंत्योदय और विज्ञान की उतनी समझ नहीं रही हो लेकिन उन्होंने दोनों का संगम किया। इसलिए उनके किसान डेढ़ कमरे के आवास से निकल कर डेढ़ एकड़ के बंगले में रहने लगे। हमारे यहां खेत बंटते रहे, खेती वर्षा पर निर्भर रही, तो इजरायल ने अपने रेगिस्तानी जमीन पर भी साल में तीन बार, तीन तरह की फसलें पैदा करने की तकनीक खोज निकाली। नोबेल पुरस्कार विजेता और इजरायली राष्ट्रपति सिमान पेरेस का अधिकारिक निवास हो या वर्तमान राष्ट्रपति का निवास स्थान हो वह छोटा सा बंगला है जो कि रायसीना हिल के किसी कमरे से भी छोटा होगा। इजरायल में प्रधानमंत्री का कोई अधिकृत घर ही नहीं है। वहां केंद्रीय मंत्री अपने छोटे-छोटे फ्लैटस में रहते हैं, जबकि कृषि वैज्ञानिक और रक्षा विश्ोषज्ञ बड़े-बड़े आलिशान बंगले में रहते हैंं। इजरायल आज बड़ा हो गया क्यों कि उन्होंने अपने नेताओं को छोटा बनाकर रखा, हम छोटे देश हैं क्यों कि हमारे नेता बड़े हैं।
इजरायल के सरकारी भवनों में जाना आसान नहीं है। कड़ी सुरक्षा और पहरा होता है, तरह-तरह की जांच की जाती है। क्यों कि फिलस्तिीनी आतंकी हमले का भय हमेशा बना रहता है। इजरायल के सुरक्षा अधिकारी आगंतुकों को संदेह की नजर से देखते हैं लेकिन समाधान होते ही सम्मानजनक व्यवहार भी करते हैं। इसलिए वहां के मंत्री, सांसद, सचिव और अन्य सरकारी अधिकारी आगंतुकों का सुरक्षा जांच में समय बचाने के लिए खुद ही सरकारी भवनों से बाहर आकर किसी चाय, रेस्त्रा आदि में बैठकर बात कर लेते हैं। न कोई तामझाम, ना ही लावलश्कर। यह सच है कि इजरायल और फिलीस्तीन के संघर्ष के कारण मध्यपूर्व से दुनियां में आतंकवाद फैलने में मदद मिली। इरायल के जन्म के बाद से ही पूरा मध्यपूर्व सतत आतंकवाद, युद्ध में धधकता रहा है। यह भी सच है कि गत बीस सालों में दस हजार फिलीस्तीनियों की हत्या इजरायल ने की है तो फिलीस्तिनी आतंकियों ने हजारों इजरायली नागरिकों को मार डाला है। मरने वालों में, हताहतो में महिलाओं और बच्चों की संख्या भी कम नहीं है। इजरायल के दोनो तरफ फिलीस्तिनी प्रदेश है। पश्चिम में स्थित गाजापटटी अतिशय गरीबी, अन्याय अभाव से ग्रस्त है जिसपर से इजरायल ने अपना कब्जा छोड़ दिया है। गाजा के लोग मिशाईलों से इजरायल पर हमल करते हैं हांलाकि ये मिशाईल ज्यादा मारक क्षमता वाले नहीं होते। कुछ तो लोहार की भटिटयों में तैयार होते हैं फिर भी इजरायल को गुस्सा आता है तो गाजापटटी में जाने वाले राशन, सिमेंट, दवाओं की आपूर्ति को रोक देता है और नाकेबंदी को कड़ा कर देता है। फिलीस्तीन का दूसरा भाग वेस्ट बैंक हांलाकि नाम में वेस्ट है लेकिन यह भाग भी इजरायल के पूर्व में ही आता है। इजरायल ने इस क्ष्ोत्र में अपनी 6०० सुरक्षा चौकियां बना रखी है। वे फिलीस्तीनियों को निकलने नहीं देते, कतारों में खड़े रखते हैं और कड़ी जांच करते हैं। इजरायल पर हर समय मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहूड, फिलीस्तीन के हमास और लेबनान के हिजबु“ा के आतंकी हमलों का खतरा मंडराता रहता है।
इजरायल में स्टैफ बर्थ हाईमर सबसे प्रमुख उद्योगपति हैं। पूरे इजरायल के राष्ट्रीय उत्पादन का 1० फीसदी उनके उद्योगों में अकेले होता है। स्टैफ चाहते तो तेल अबीब, न्यूयार्क, लंदन कहीं भी व्यवसाय कर सकते थ्ो लेकिन उन्होंने इजरायल के सबसे पिछड़े हिस्से में अपना उद्योग डाला जो लेबनान की सीमा पर है। हमेशा उनके उद्योगों को आतंकी खतरे से जूझना पड़ता है कारण कि लेबनान की सीमा पर होने से हिजबु“ा आतंकी संगठन का खतरा मंडरता रहता है। लेकिन उनका देशप्रेम और अपने देश के पिछड़े क्ष्ोत्र के युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने की इच्छा इतनी तीब्र है कि मिशाईलों की परवाह नहीं करते। जहां सबसे अधिक खतरा है वहां रोबोट से काम करवाते हैं। स्टैफ औद्योगिक केंद्र में ही युवकों को शोध कराने, पढ़ाने और प्रशिक्षण की संस्थाएं भी बनाई गई हैं। इस जगह पर कुल 1,8०० इंजिनियर दिनरात काम कर रहे हैं। लेकिन हमारे देश में पैसे के पुजारियों की बहुतायत है। हम बहुत विकसित हो गए हैं क्यों कि भारत में कुछ मुटठीभर लोग करोड़ों संपत्ति के मालिक हैं। बाजार बदल गया है, विदेशी ब्रांडस आ गए हैं, पति-प‘ि बच्चों की अलग-अलग गाड़ियां हैं। डिस्कों से लेकर रेन डांस होते हैं, दिखावे की सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखने को कर्ज का बढता बोझ, तुरंत पैसा कमाने के लिए श्ोयरमार्केट, झपटमारी यह सबकुछ दिशाहीन नौका की तरह देश को लेकर भटक रहा है। 2०11 की जनगणना को देखें तो सवा करोड़ की आबादी है जिनमें 3० करोड़ के आसपास उच्च और मध्यमवर्ग है। बाकी दरिद्रता का जीवन जी रहे हैं। अगले दस सालों में यह आंकड़ा और बढ़ने वाला है। कारण सिर्फ एक है- देश बाद में, पहले हम। विकसित देशों में भी भ्रष्टाचार है लेकिन वहां का प्रत्येक मंत्री, सांसद और विधायक आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ नहीं है। इजरायल भी इससे अलग नहीं लेकिन वहां पर इजरायल की मर्यादा, देशहित का विचार सबसे पहले होता है। कार्य की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाता। रास्ते हो या पुल उनपर जितनी सत्ताधारियों की नजर होती है उससे कहीं अधिक आम जनता अपने पैसे के पाई-पाई का हिसाब लेती है। यदि नागरिक जागरुक हैं तो किसी भी परिस्थिति को उलट सकते है, रेगिस्तान को उपजाउ बना सकते हैं, समुद्र के खारे पानी को पेयजल बना सकते हैं, अंत्योदय से लेकर राष्ट्र का कायापलट कर सकते हैं लेकिन शर्त है- इजरायल के जागरुक नागरिक।

सोमवार, 24 जुलाई 2017

4:01 am

गुरुओं की भूमि पर पाकिस्तान ड्रग्स के कारोबार


 पी मार्कण्डेय
ड्रग्स के शिकंजे में पंजाब के कसते चले जाने की हकीकत ये है कि इस साल पठानकोठ आतंकी हमले के बाद आई एम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पंजाब में हर वर्ष 75०० करोड़ के नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है। इनमें से अकेले 65०० रुपये की हेरोइन की खपत होती है। पंजाब में पहुंचने वाली सारी हेरोइन के आने का एक ही जरिया है, और वह है पाकिस्तान।
इतिहास में जिसे पंचनद, पांच नदियों का देश कहा गया। भारत वर्ष का ऐसा भूखंड जहां वीरों, और बलिदानियों की परंपरा रही है, वह अब नश्ो की गिरफ्त में है। नश्ो के कारोबार में पंजाब इतना आगे जा चुका है कि देशद्रोही हमलों तक के लिए नश्ोड़ी बिक जाते हैं। एक ऐसा ही सत्य मालवा के जगदीश सिह भोला का है। वह बचपन से पहलवान बनने का सपना देखते थे। बाद में भोला ने एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ खेलों जैसी कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व भी किया। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भोला को अर्जुन अवॉर्ड भी मिला। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि वर्ष 2००8 में पुलिस ने ड्रग्स सप्लाई के आरोप में भोला को पकड़ लिया।
अपने बेहतरीन ख्ोल कौशल के कारण पंजाब पुलिस में डीएसपी पद पर कार्यकरत भोला को सेवामुक्त कर दिया गया। लेकिन भोला यहीं नहीं रुका और जेल से बाहर आकर और भी बड़े पैमानै पर ड्रग्स के कारोबार से जुड़ गया।
पुलिस को दिए बयान में भोला ने कहा कि ड्रग्स के इस खतरनाक खेल का वह मामूली प्यादा भर है, असली खिलाड़ी तो बड़े-बड़े पदों पर बैठे मंत्री और नेता हैं। भोला की ये कहानी पंजाब को दीमक की तरह खोखला करते और वहां की एक बड़ी आबादी की नसों में समाते चले गए ड्रग्स का आंखें खोल देने वाला सच है।
ऐसा नहीं है कि पंजाब में ड्रग्स के फैलते जहर के लिए सिर्फ सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली और बीजेपी जिम्मेदार हैं, बल्कि इस खेल में पंजाब की सभी राजनीतिक पार्टियां बराबर की जिम्मेदार रही हैं। आर्युविज्ञान संस्थान के स्टडी के मुताबिक पंजाब की 2.77 करोड़ की आबादी में से करीब ०.84 फीसदी लोग नशीले पदार्थों के एडीक्ट अथवा आदी हैं। इनमें से करीब 1.23 लाख लोग हेरोइन के नश्ोड़ी हैं। जबकि पंजाब में ड्रग्स का सेवन करने वालों की संख्या करीब 8.7 लाख है। रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में हर दिन ड्रग्स के आदी लोग अपने नशे की खुराक के लिए करीब 2० करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जबकि हेरोइन के आदी हर व्यक्ति करीब 14०० रुपये प्रति दिन खर्च करता है। पंजाब के ड्रग्स के अभ्यस्त हो चुके लोगों में से 76 फीसदी 18 से 35 की उम्र के हैं, यानी कि ड्रग्स की समस्या ने राज्य के भविष्य को भी अंधकारमय बना दिया
पंजाब किस कदर तेजी से नशे की चपेट में आता जा रहा है, इसका अंदाजा नारकोटिक्स ड्रग्स ऐंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस द्बारा ड्रग्स के व्यापार से जुड़े लोगों की गिरफ्तारियों से पता चल जाता है। 2००9 में ड्रग्स स्मगलिग और डीलिग के मामले में 5०91 लोगों को अरेस्ट किया गया था जबकि 2०14 में 17००1 लोगों को अरेस्ट किया गया। इस दौरान जब्त की गई हेरोइन की मात्रा भी 155 किलो से 637 किलो तक पहुंच गई।

ड्रग्स के अरबों रुपये के खेल में सभी है शामिल
पंजाब में आने वाले ड्रग्स का लगभग नब्बे फीसदी हिस्सा पाकिस्तान से स्मगलिग के जरिए पहुंचाया जाता है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी न सिर्फ पंजाब की सीमा से भारत में आतंकवादियों को घुसाने की कोशिश करती है बल्कि उसने पंजाब को नशे के अड्डे में तब्दील कर दिया है। लेकिन सीमापार से होने वाली इस ड्रग्स स्मगलिग के खेल में न सिर्फ पाकिस्तान और आंतकी संगठन शामिल हैं, बल्कि इसमें ड्रग्स माफिया से लेकर पंजाब के बड़े नेता, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तक शामिल हैं। ईडी से पूछताछ में 7०० करोड़ के ड्रग्स स्कैंडल में पकड़े गए भोला ने राज्य के एक बड़े रसूखदार मंत्री के रिश्तेदार का नाम भी ड्रग्स के व्यापार से जुड़े होने के लिए लिया था। लेकिन इस रिपोर्ट के बारे में न तो सरकार और न ही पुलिस कुछ भी कहने को तैयार है।
पिछले साल जून में राजस्थान पुलिस ने फजिलका के ब्लॉक स्तर के अकाली और बीजेपी के दो नेताओं को उनकी गाड़ी में 7.5 किलो नशीले पदार्थ ले जाते हुए गिरफ्तार किया गया था। अलजाजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ड्रग्स की समस्या से जूझने वाले युवाओं का कहना है कि चुनावों के समय पार्टियों का स्थानीय ताकतवर व्यक्ति सभी युवाओं को एक जगह इकट्ठा करके उनके बीच ड्रग्स बांटता है, उस समय आप जिस भी ड्रग्स का नाम लो, सब मिल जाता है। ड्रग्स से होने वाली मोटी कमाई का इस्तेमाल पार्टियां और नेता चुनाव पचार से लेकर चुनाव जीतने तक इस्तेमाल करते हैं।
नशे की बढ़ती लत के कारण पंजाब लगातार पिछड़ता जा रहा है। कृषि क्षेत्र का कमजोर होना, बढ़ती हुई बेरोजगारी प्रमुख है। बेरोजगार पंजाबी युवाओं की महत्वाकांक्षाएं तो बहुत ज्यादा है लेकिन उसे पूरा करने के लिए न तो वहां नौकरियां है और न ही कोई कामकाज सिखाने वाले बढ़िया ट्रेनिग इंस्टीट्यूट। आप चाहें उड़ता पंजाब जैसी फिल्मों पर लाख प्रतिबंध लगा लगाकर ड्रग्स की समस्या पर पर्दा तो डाल सकते हैं लेकिन उसे खत्म नहीं कर सकते। अगर पंजाब से नश्ो की लत को खत्म करना है तो पहला कदम इसमें लि’ राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों और डàग्स माफिया पर शिकंजा कसना ही होगा।



3:57 am

किन क्षेत्रों में भारत ने लहराया तिरंगा


पी मार्कण्डेय
आजादी के समय ही अंग्रेज भविष्यवेत्ताओं ने कहना शुरु कर दिया था कि भारत अपनी आजादी को सहेज नहीं पाएगा। टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा कारण कि यहां पर विभिन्न भाषाएं, क्ष्ोत्रवार परंपराएं, जातियों और धर्म में बंटा हुआ है, इसलिए इसके लिए लोकतंत्र संभव ही नहीं है। लेकिन 15 अगस्त 1957 के बाद से आजतक आजाद भारत के इतिहास में कोई सबसे बड़ी उपलब्धि है तो वह है भारत का बेदाग लोकतंत्र। सत्ता परिवर्तन, बैल्ोट बाक्स रिवोल्यूशन, संकट में केंद्रीयकरण, सामान्य अवस्था में शानदार तरीके से चल रहा संघवाद, लचीला संविधान और लगातार जागरुक हो रहे मतदाताा भारत की असली ताकत हैं, तो वहीं स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि भी हैं।
इतना ही नहीं भारतीयों ने दुनियां के अनेक क्ष्ोत्रों में अपनी कामयाबी का परचम भी लहराया है। बल्कि दुनियां के अनेक राष्ट्रों को अपनी कामयाबी का लोहा मनवाया है। यदि हम अबतक की उपलब्धियों पर सरसरी नजर डालें तो अपने लोकतंत्र, गणतंत्र और आजादी पर गर्व कर सकेंगे।
भारत दुनियां का दूसरे नंबर पर सबसे बड़ा आईटी उद्योग
भारत ने आईटी के क्ष्ोत्र अपना लोहा दुनिया से मनवा लिया है। चीन के बाद दुनिया की दूसरे सबसे बड़े आईटी कारोबारी में भारत का स्थान है। देश में इस व्यवसाय के फलने-फूलने की गति को देखते हुए कहा जा सकता है कि अगले पांच सालों में भारत पहले नंबर पर आ जायेगा।
हमारी शान है हमारी वायुसैन्य शक्ति
देश की वायु सेना की ताकत दुनियां के विकसित देशों को टक्कर देने वाला है। बल्कि कई मामलों में तो हम दुनियां के नंबर वन एयरफोर्स हैं। हमारे पास दुनियां के सबसे अधिक कौशलपूर्ण और समर्पित वायु सैनिक है तो वहीं हमारे पायलटों की क्षमता अमेरिकी पायलटों से कई मामलों में आगे हैं। इस समय 182० एयरक्राफ्ट्स, 9०5 कॉम्बैट विमान, 595 फाइटर प्लेन्स और 31० अटैकर्स विमान के साथ देश कि वायु सेना दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली हवाई सेना मानी जाती है।
परमाणु शक्ति में हम किसी से कम नहीं
हमारे पास 21 न्यूक्लियर प्लांट्स और 75 से 11० परमाणु हथियार हैं। भारत विश्व में परमाणु शक्ति संपन्नता के मामले में टॉप फाइव देशों में गर्व के साथ खड़ा है। बावजूद इसके हमारी सैन्य ताकत पूरी विनम्रता से नो फस्र्ट यूज पॉलिसी पर कायम रहेगी।
कृषि क्ष्ोत्र में आत्मनिर्भरता
अब भारत दुनियां की बड़ी अर्थव्यवस्था के रुप में अपनी पहचान कायम कर चुका है। आजादी के बाद से अबतक 2.7 लाख करोड़ से बढ़कर हमारी अर्थव्यवस्था 57 लाख करोड़ से भी अधिक की हो चुकी है। विदेशी मुद्रा भंडार 3०० बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है। देशभर में लगातार सड़कों, पुलों, ओवरब्रीज का निर्माण तो हुआ ही है, साथ ही बंदरगाहों सहित गांव से लेकर औद्यौगिक स्थल तक विश्वस्तरीय सड़क मार्गो से जोड़े जा रहे हैं। खाद्यान्न के मामले में हम दालों के सबसे अधिक उत्पादक हैं तो चीनी हमारे यहां दुनियां में दूसरे नंबर पर सबसे अधिक उत्पादन हो रहा है। कपास के मामले में हम अब भी तीसरे बड़े उत्पादक हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क
आजादी के बाद देश को पुरान रेल नेटवर्क मिला जो कि 33 हजार किमी लंबी थी। आजादी के तुंरत बाद इनका राष्ट्रीयकरण किया गया और अब भारतीय रेल दुनियां के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क के रुप में जाना जाता है। अब 68,312 किमी लंबे रास्ते पर 115,००० किमी का रेल टैàक है। कुल भारतीय रेलव में 7,112 रेलवे स्टेशन हैं। मुंबई के शिवाजी टर्मिनल सहित देश के पहाड़ी रास्तों पर चलने वाली रेल को यूनेस्कों ने विश्व धरोहर में शामिल किया है।
विविध उपलब्धियां
भारत ने आजादी के समय ही वयस्क मताधिकार को लागू किया जबकि यूरोप के कई देशों में यह बहुत देर से शुरु हुआ। संवैधानिक परंपराओं का जनक अमेरिका भी अपनी आजादी के तकरीबन डेढ़ सौ सालों बाद इसे लागू किया। भारत ने दुनिया का बहिष्कार झेल कर भी शांतिपूर्ण उददेश्यों के लिए परमाणु शक्ति हासिल की जो कि सबसे कम लागत में परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने वाला देश भारत है। थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा विकसित करने में भारत का दुनियां में अलग पहचान है। अंतरिक्ष में वाणिज्यिक उपग्रहों को सबसे कम कीमत पर लांच करने का रिकार्ड भारत के पास है। परमाणु पनडुब्बी लांच करनेवाले पांच देशों में से भारत है। चांद और मंगल पर मानव रहित मिशन भेजने वाले पांच देशों में से एक भारत है। इतना ही नहीं, दुनिया के सबसे कम लागत में सुपर कंप्यूटर का निर्माण भारत ने किया।
स्वतंत्र भारत की उपलब्धियों में यह महज चंद बातें हैं, फेहरिस्त लंबी है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भारत सो रहा है जिसदिन जागेगा उसदिन इतना तेजी से विष्फोट करेगा कि दुनियां के कान बहरे हो जाएंगे। भारत पोखरण विष्फोट के बाद अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज गूंजा दी है।

रविवार, 26 मार्च 2017

5:18 am

आतंक और कालाधन पर देशभर में मोदी की छापेमारी



पी मार्कण्डेय
गत दिनों संसद में विपक्ष की ओर से कटाक्ष किया था कि प्रधानमंत्री ने चीन में जी-2० की बैठक में 'काला धन’ के ऊपर टिप्पणी की है, वो नाकाफी है और हमें शीघ्र परिणाम चाहिए। हम उनसे ये जानना चाहते हैं कि चुनाव से पहले जब वो पूरे देश में बखान कर रहे थे कि कालाधन 1०० दिन के भीतर वापस लाएंगे तो अब देर किस बात की है? क्या उनको इस बात का ज्ञान नहीं था कि अंतर्राष्ट्रीय मनी लांड्रर्स भी हैं? क्या इस बात का भी ज्ञान नहीं था कि जो अंतर्राष्ट्रीय कानून हैं वो इस मामले में बड़े पेचीदा हैं और कई मुल्कों में कई ऐसे बैंक हैं जो वहाँ के कानून के तहत गोपनीयता मैन्टेन करते हैं?

कांग्रेस पार्टी ने जोर देकर कहा कि हम साफ तौर से ये कहना चाहते हैं कि पिछले दो साल में जो काला धन देश में वापस आया भी है, उसकी सारी बुनियाद यूपीए सरकार के समय में रखी गई थी। 1०० से ज्यादा टैक्स इनफर्मेशन एक्सचेंज एग्रीमेंट साईन किए गए थे, ड्यूल टैक्स अवॉयडेंस ट्रीटी साईन की गई थी और एक जो ढांचा आर्थिक महामंदी के बाद, 2००8 के बाद यूपीए की सरकार ने तय किया था, या फिर उसकी बुनियाद रखी थी, उसके कारण पिछले दो वर्ष में ये कुछ काला धन वापस लेकर आ सके। आगे कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि पनामा पेपर्स के माध्यम से जिन लोगों के नाम का खुलासा हुआ क्या सरकार ने उन नामों को सार्वजनिक किया? क्या सरकार ने उन लोगों को गिरफ्तार किया ?

लेकिन विपक्ष सहित कांग्रेस को इस बात का इलहाम नहीं था कि प्रधानमंत्री नरेंद्ग मोदी देशभर में एक साथ इनकम टैक्स की रेड मार देंगे। काला धन सिर्फ एक आर्थिक समस्या नहीं है बल्कि इसके वृहत्तर आयाम हैं जो न केवल सामान्य आपराधिक कृत्यों से संबद्ध है अपितु आतंकवाद से भी जुड़ जाता है। काले धन के मामले में सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 5०० और 1००० रुपए के नोट को गत आठ नवंबर की रात 12 बजे से बंद कर दिया।

लंबे समय से यह देखा जा रहा है कि 5०० एवं 1००० के जाली नोट से आतंकवादियों को भी फंडिग होती थी। इस तरह से इस कदम से आतंकवाद व काला धन दोनों पर चोट होगा क्योंकि दोनों आपस में अंतर्संबंधित हैं। काले धन से तात्पर्य अघोषित आय अथवा कर अपवंचित आय से है अर्थात जिस पर आय कर और अन्य कर नहीं चुकाए जाते हैं। सामान्यत: अवैध खनन करके, सरकारी विकास योजनाओं के धन की चोरी करके, रिश्वतखोरी व टैक्स चोरी करके जो धन देश व विदेश में जमा किया जाता है, वह धन कालाधन है। जिस धन पर एक महत्वपूर्ण भाग सरकार को करों के रुप में प्राप्त होता है और अंतत: देश की समृद्धि एवं सामाजिक आर्थिक विकास में समायोजित होता है, वह काले धन के रूप में कुछ विशेष वर्गों के पास ही रह जाता है। ऐसे में सरकार के इस कदम के महत्व को समझा जा सकता है।
सरकार के इस कदम से देश की राजनीति और चुनाव प्रक्रिया को भी कालेधन से मुक्त किया जा सकेगा। ठेके उपलब्ध कराने, कारोबार में छूट देने, लाइसेंस देने, गोपनीय सूचनाएं देने तथा ऐसे कानून बनवाने, जिनमें बचने के रास्ते हों, के नाम पर प्रभावशाली राजनीतिज्ञ जमकर काला धन कमाते हैं। इसमें नौकरशाही की संलिप्तता रहती थी। काला धन देश की अर्थव्यवस्था तथा राष्ट्र की सामुदायिक विकास योजनाओं पर घातक प्रभाव डालकर गतिरोध पैदा करता है। काले धन के कारण उत्पादन दर, स्फीति दर, बेरोजगारी एवं निर्धनता आदि की सही दरों को मापने में भी बाधा पहुंचती है। इससे एकओर सामाजिक असमानता बढ़ती है, वहीं ईमानदार नागरिकों में निराशा और हताशा बढ़ती है। अधिकांशत: काले धन का उपयोग अवैध कार्यों एवं आतंकवाद को प्रोत्साहन देने के लिए किया जाता है।

इन नोटों के बाहर होने से संपूर्ण अर्थव्यवस्था कैशलैस बनेगी। ब्लैकमनी, भ्रष्टाचार, अन्य अपराधों को नियंत्रित करने के अतिरिक्त यह संपूर्ण बैंकिग व्यवस्था को मजबूत करेगा, जो पुन: संपूर्ण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त रियल स्टेट जो ब्लैकमनी का हब हुआ करता था में काफी सुधार होगा। इससे उनके मूल्य तर्कसंगत होंगे तथा सामान्य लोग भी अपने घर के सपनों को पूरा कर सकेंगे। चिकित्सा, इंजीनियरिग इत्यादि व्यावसायिक शिक्षा में भी काले धन की संबद्धता थी तथा ये काफी हद तक विशिष्ट वर्ग के लिए संबंधित हो गई थी, परंतु अब ब्लैक मनी के सफाये के बाद चीजें काफी बदलेंगी। सरकार के उपरोक्त कदम से ऑफिसियल ट्रांजिक्शन में वृद्धि होगी। इससे केन्द्र एवं राज्य सरकारों के राजस्व में जबरदस्त लाभ होगा क्योंकि ब्लैकमनी की समानान्तर अर्थव्यवस्था खत्म होगी। अधिकृत ट्रांजिकशन से लंबी अवधि में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों पर भी प्रभाव बढ़ेगा।

हांलाकि पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने काले धन की जांच हेतु पूर्व जज की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया था। विदेशों में जमा काले धन हेतु 2०15 में भारत सरकार द्बारा मजबूत कानून बनाया गया और विभिन्न देशों के साथ टैक्स समझौते में परिवर्तन किया गया। अमेरिका सहित विभिन्न देशों के साथ सूचना आदान प्रदान करने का प्रावधान किया गया ताकि बेनामी संपत्ति को रोका जा सके। 2०15 के इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत अवैध धन रखने पर 1० वर्ष की सख्त सजा एवं जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। इसके साथ ही लोगों को डिसक्लोजर विडो बनाकर ब्लैक मनी घोषित करने के लिए कहा गया। इस स्कीम के तहत 65,००० करोड़ रुपये बाहर आए। इसके बाद सरकार का यह चौंकाने वाला दूरगामी निर्णय सामने आया।

काले धन और काले नोटों में लिपटे देश विरोधी तत्वों के पास मौजूदा 5०० व 1००० के नोट मात्र कागज के टुकड़े के समान रह जाएंगे। इन पहलों के और भी अच्छे परिणाम मिल सकेंगे, जब काले धन के विरुद्ध लड़ाई में जन सहभागिता बढ़े तथा देशवासी समस्या के प्रति जागरूकता का परिचय दें। वैसे, सरकार के इस कदम से जागरूकता बढ़ी है और माहौल काफी अच्छा बनता दिख रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के इस ऐतिहासिक फैसले से कालाधन व आतंकवाद चारो खाने चित हो गए है।
कैसे निपटेगा आतंकवाद और कालाधन से
नकली नोटों के धंधे में शामिल लोग ज्यादातर बड़े नोटों का ही इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उन्हें इस्तेमाल में लाना बेहद आसान होता है। कालाधन पैदा करने वाले और इस्तेमाल में लाने वाले ज्यादातर अपराधी बड़े नोटों का ही इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उन्हें लाना और ले जाना काफी आसान होता है। 5०० और 1००० के नोटों पर रोक लगाने से ऐसे सभी अपराधों पर लगाम लगाई जा सकेगी। गौरतलब है कि फिलहाल पूरे देश में चल रही करेंसी में 5०० और 1००० रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 86 फीसदी है, जबकि 2००7 में यह आंकड़ा 69 फीसदी था।
ज्यादातर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भी नकली नोट, हवाला का पैसा और काला धन का ही इस्तेमाल किया जाता है। बड़े करेंसी नोटों पर लगाम कसने के चलते आतंकवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने की संभावना अधिक होगी। विश्व बैंक ने जुलाई, 2०1० में जारी की गई अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 2००7 में भ्रष्टाचार की अर्थव्यवस्था देश की इकॉनमी के 23.2 फीसदी के बराबर थी, जबकि 1999 में यह आंकड़ा 2०.7 फीसदी के बराबर थी। इसके अलावा भारत समेत कई एजेंसियों ने भी इसी तरह के अनुमान जताए थे। हार्वर्ड की स्टडी के मुताबिक बड़े करेंसी नोटों को बंद करने से टैक्स से बचने वालों, वित्तीय अपराधियों, आतंकियों के आर्थिक नेटवर्क और भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सकेगी। 5०० रुपए के 165० करोड़ नोट चलन में हैं। यानी कुल करेंसी का 47.85% है। 1००० रुपए के 67० करोड़ नोट चलन में हैं। मूल्य 6.3 लाख करोड़ रुपए। यानी कुल करेंसी का 38.54% है।

कम होंगी प्रॉपर्टी की कीमत, घर का सपना होगा साकार
हालांकि ये फैसला अप्रत्याशित रूप से अचानक ले लिया गया है लेकिन उसके बावजूद जानकारों की माने तो ये फैसला गरीब, मिडिल क्लास और नौकरी पेशा लोगों के लिए बेहद फायदेमंद रहने वाला है। इसके जो दो सबसे बड़े फायदे बताए जा रहे हैं वो हैं रियल एस्टेट की कीमतों में गिरावट आएगी और जो लोग उच्च शिक्षा लेने से वंचित रह जाते हैं उन्हें परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
हार्वर्ड की एक स्टडी के मुताबिक भारत समेत विकासशील देशों में सबसे ज्यादा काला धन का इस्तेमाल रियल एस्टेट के कारोबार में ही किया जाता है। फिलहाल भ्रष्टाचार में लिप्त लोग अपनी अघोषित आय को रीयल एस्टेट सेक्टर में निवेश करके खुद को साफ-सुथरा साबित करने की कोशिश करते हैं। इस फैसले से ऐसे लोग नकद भुगतान नहीं कर सकेंगे। ऐसे में प्रॉपर्टी की कीमतें कम होंगी और गरीबों के लिए मकान का सपना आसान हो सकेगा।

सरकार के रेवेन्यू में होगा इजाफा होगा
इस फैसले के चलते एक तरफ सरकार के रेवेन्यू में इजाफा होगा। वहीं, ब्लैक मनी को वाइट इकॉनमी के दायरे में लाने में भी मदद मिलेगी। यही नहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में भी इसे अहम माना जा रहा है। इसके अलावा हायर एजुकेशन ऐसा सेक्टर है, जहां भ्रष्टाचार में लिप्त लोग अपनी पूंजी लगाते हैं। कैपिटेशन फीस के चलते उच्च शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर हो चुकी है। इस फैसले से उच्च शिक्षा के मामले में भी समानता की स्थिति आ सकेगी क्योंकि अवैध कैश लेनदेन संभव नहीं होगा। यही नहीं इससे महंगाई पर भी लगाम लग सकेगी।

25 देशों में बैन हैं बड़े नोट
चीन, ब्रिटेन, अमेरिका, सिगापुर जैसे 25 से ज्यादा बड़े देशों में बड़े नोटों पर पूरी तरह से बैन है। चीन में 1०० युआन, अमेरिका में 1०० डॉलर और ब्रिटेन में 5० पाउंड से बड़ा नोट चलन में नहीं रहता। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने बड़े नोटों को भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह बताया था।


5:16 am

आशियाने की आस होगी पूरी ?


पी मार्कण्डेय
उत्तर प्रदेश और चार राज्यों के चुनाव के समय पेश होने वाले केंद्रीय बजट को लेकर विपक्ष कई आशंकाओं से भरा था। इसके लिए विपक्ष ने चुनाव अयोग के चौखट तक गुहार लगाया लेकिन संवैधानिक प्रतिबद्धता के इसे पेश होना ही था। विपक्ष को डर था कि चुनाव में फायदा न उठा ले केंद्र सरकार, लोक लुभावन हो सकता है आगामी बजट, चुनावी राज्यों के लिए खास पैकेज हो सकता है इस बजट में। लेकिन हुआ इसके विपरीत।
हालांकि मंदी की मार झेल रहे रियल स्टेट की कमर नोटबन्दी ने तोड़ दी थी फिर भी जीएसटी को लेकर सरकार की तेजी, सबके लिए आवास पिछले बजट में किफायती आवासों को आयकर के दायरे से मुक्त करने आदि की सरकारी पहल को लेकर रियल स्टेट इस बजट से काफी आशान्वित था। देश की जीडीपी में सबसे अधिक योगदान करने वाले और रोजगार प्रदान करने वाले रियल एस्टेट सेक्टर को भी इस साल के बजट से काफी उम्मीदें थी। बजट पेश होते ही रियल स्टेट कारोबारियों के चेहरे खिल गए।
गत कुछ महीनों में केंद्र सरकार इस सेक्टर को बेहतर बनाने के लिए विशेष रूप से सक्रिय रही है। रियल एस्टेट बिल (रेरा), वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), हाल ही में विमुद्रीकरण के 5०दिन पूरे होना, प्रधानमंत्री द्बारा साल के आखिरी दिन पर अफोर्डेबल हाउसिग से जुड़ी तमाम रियायतें, और साल की शुरुआत में बैंकों के ब्याज दर में कटौती, कुल मिलाकर ये सभी संकेत 2०17 रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होने वाले हैं।
बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग को सरकार ने आधारभूत ढांच के अंर्तगत लिया है। वास्तव में रियल स्टेट कारोबारियों के लिए यह बहुत बड़ा अवसर है। यह न केवल कारोबारियों के लिए बल्कि खरीददारों के लिए भी राहत भरा कदम है। अब बिल्डर भी मकानों को बेचने में जल्दी करेंगे और कीमतों को लेकर उतार-चढाव, सौदेबाजी का माहौल खत्म होगा। सिग्नेचर ग्लोबल के प्रदीप अग्रवाल कहते हैं कि हमें जैसी उम्मीद थी बजट वैसा ही आया है। सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिल्डरों को मकान बनाकर बेचने में जो फायदा होगा उस पर टैक्स नहीं देना पड़ेगा। टैक्स में छूट मिलने से आवासों के दाम घटेंगे। अब तक आवासों के कंपलीशन सर्टिफिकेट मिल जाने के बाद सरकार यह मान लेती थी कि आावास बिक गए अथवा किराए पर दे दिए गए और टैक्स वसूली शुरु हो जाती थी। लेकिन अब बजट में ऐलान किया गया है कि यदि आवास निर्माण पूरी होने के बाद भी आगामी एक साल तक यदि आवास बिकते नहीं है तो बिल्डर को कोई टैक्स नहीं देना होगा।




अवनीश सूद , डायरेक्टर , ईरोस ग्रुप

केंद्रीय बजट सत्र 2०16-17 की घोषणा के समय से ही सरकार रियल्टी सेक्टर के लिये काफी सक्रिय रही है। अफोर्डेबल हाउसिग के तहत सरकार ने डेवलपर्स और खरीदार के साथ रेंटल हाउसिग के लिये कई घोषणायें की बैंकों के द्बारा ब्याज दरों में कटौती का सभी होम लोन लेने वालों को लाभ मिलेगा लेकिन अफोर्डेबल हाउसिग के तहत खरीदने वालों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा।

दीपक कपूर , प्रेसिडेंट- क्रेडाई पश्चिमी ऊ.प्र. एवं डायरेक्टर, गुलशन होम्.ज
अफोर्डेबल हाउसिग और हाउसिग फॉर ऑल, यह सरकार के दो मुख्य मुद्दे रहे, और इन पर काम भी पूरी निष्ठा के साथ हुआ। बजट में काफी कुछ बाते हैं जो रियल स्टेटक के लिए वरदान साबित होंगी।

अशोक गुप्ता , सीएमडी, अजनारा इंडिया

इस साल के बजट में हम इन्फ्रास्ट्रकचर डेवलपमेंट को सरकार के मुख्य लक्ष्य के तौर पर देख पायेंगे। इस से जुड़ी बड़ी घोषणाओं का अनुमान हम लगा सकते हैं, खासतौर से उन क्षेत्रों में जो की प्रधान मंत्री की ही अम्रुत (अटल मिशन फॉर रेजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉरमेशन) स्कीम के तहत आती हैं। जीएसटी का कार्यान्वन, इनकम टैक्स में रियायतें, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न छूट प्रदान करना एवं रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट और इन्फ्रास्ट्रकचर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट को प्रोत्साहित करना मुख्या होन्ो की उम्मीद थी जो पूरी होती दिख रही है।

धीरज जैन , डायरेक्टर , महागुन ग्रुप


इस साल के बजट में हम रियल एस्टेट सेक्टर से जुडे तमाम उद्योगों जैसे स्टील एवं सीमेंट उद्योगों की नीतियों में भी स्पष्टीकरण एवं मानिकरण होने की आशा थी जो पूरी हो रही है। उद्योग घरों के दामों पर सीधे तरीके से प्रभाव डालते हैं। वही दूसरी तरफ गृह ऋण पर मिलने वाली टैक्स कटौती की सीमा को 2 लाख रुपयों से ज्यादा बढ़ाना चाहिए। यह राशि आज के परिप्रेक्ष्य में बहुत ही कम हैं, और टियर 1 के शहर में तो कई बार औसत दाम ही एक करोड़ के हैं।

प्रदीप अग्रवाल,चेयरमैन,सिग्नेचर ग्लोबल


प्रधानमंत्री ने अफोर्डेबल हाउसिग सेगमेंट के तहत बड़ी घोषणाएं की और ईडब्लूएस एवं एलआईजी वर्ग के लोगों को घर खरीदने की तरफ प्रेरित किया, साथ ही साथ साल के शुरुआत में कई बैंको ने भी अपने ब्याज दरों में कटौती की यानी की कुलमिलाकर सभी संकेत सेक्टर के लिए अच्छे नजर आ रहे हैं।

अश्वनी प्रकाश , ईडी, पैरामाउंट ग्रुप

इस साल के बजट में रियल एस्टेट को सीधे तरीके से लाभ पहुंचाने वाली कोई घोषणा नहीं दिखाई देती। पिछले साल हाउसिग फॉर आल को गति मिली और साथ ही कई अहम बिल भी पास हुए पर इस साल बजट में बुनियादी संरचना से जुड़े महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की उम्मीद थी जो जिसने निराश किया है।




5:15 am

जाट आरक्षण कल से आज तक


पी मार्कण्डेय
कालिका रंजन अपनी किताब में लिखते हैं कि जाट मरते वक्त अपने उत्तराधिकारी को यह बता कर मरता है कि किस-किसका कितना कर्जा चुकाना है। जाटों की उत्पत्ति और इतिहास पर कालिका रंजन कानूनगो, उपेंद्र नाथ शर्मा, जदुनाथ सरकार, नत्थन सिह और कुंवर नटवर सिह ने भी लिखा है और जाटों के गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया है। भारत पर विदेशी हमले होते रहे हैं। अपनी जमीन की लड़ाई जाटों ने अपनी जान की बाजी लगाकर लड़ी है। इस लड़ाई में जाट महिलाओं का योगदान भी कम नहीं रहा है। हरियाणा पंजाब सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यदि गर्भवती मां खेत में काम करते हुए दिखे या देश की सीमाओं पर दुश्मनों से लोहा लेता हुए कोई जवान दिखे तो समझ जाईये वह जाट होगा। साहस और शारीरिक श्रम करना जाट का सहज गुण है, इसलिए जाटों को लेकर ही कभी लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था जय जवान जय किसान। मदन मोहन मालवीय ने कहा था भारत की रीढ़ जाट ही हैं।
जाटों में अभिव्यक्ति की भारी कमी है कारण अपनी बात को कैसे कहना-रखना है, यह जाट के लिए काफी मुश्किल है। जाटों से जुड़ी एक कहावत मशहूर है कि आगे सोचे दुनिया और पीछे सोचे जाट यानी दुनिया के दूसरे लोग तो करने से पहले सोचते हैं लेकिन जाट करने के बाद सोचता है। यह जाटों की सबसे बड़ी खामियों में से एक है, जिसे अब दूर करना चाहिए।
औरंगजेब की धर्म विरोधी नीतियों के खिलाफ विद्रोह के बारे में ठाकुर सुरजनसिह शेखावत अपनी पुस्तक गिरधर वंश प्रकाश जो राजस्थान के तत्कालीन खंडेला ठिकाने का वृहद् इतिहास है में लिखते है कि मेवात प्रांत के बृजमंडल के निवासी जाट हांलाकि खेतिहर किसान थे लेकिन वे जन्मजात लड़ाकू वीर योद्धा भी थे। अन्याय और अत्याचार के प्रतिकार हेतु शक्तिशाली सत्ताबल से टकराने के लिए भी वे सदैव कटिबद्ध रहते थे। औरंगजेब की हिन्दू धर्म विरोधी नीति व मथुरा व वृन्दावन के देवमन्दिरों को ध्वस्त करने के चलते उत्तेजित जाटों ने गोकुला के नेतृत्व में संगठित होकर स्थानीय मुगल सेनाधिकारियों से डटकर मुकाबला किया था। उनसे लड़ते हुए अनेक मुगल मनसबदार मारे गए। जाटों ने गांवों का लगान देना बंद कर दिया मुगल सेना से लड़ते हुए गोकुला के मारे जाने पर सिनसिनी गांव के चौधरी भज्जाराम के पुत्र राजाराम जो अप्रतिम वीर और योद्धा था ने उस विद्रोह का नेतृत्व संभाला।

राजाराम ने बादशाह के खालसा गांव में जमकर लूटपाट की एवं दिल्ली आगरा के बीच आवागमन के प्रमुख मार्गों को असुरक्षित बना दिया जो भी मुगल सेनापति उसे दबाने व दंडित करने के लिए भेजे गए वे सब पराजित होकर भाग छूटे। राजाराम ने आगरा के समीप निर्मित सम्राट अकबर के भव्य और विशाल मकबरे को तोड़फोड़ कर वहां पर सुसज्जित बहुमूल्य साजसामान लुट लिया व कब्रों को खोदकर सम्राट अकबर व जहाँगीर के अस्ति-पंजरों को निकालकर अग्नि को समर्पित कर दिया। केसरीसिह समर के अनुसार-
ढाही मसती बसती करी, खोद कबर करि खड्ड
अकबर अरु जहाँगीर के , गाडे कढि हड्ड
प्रसिद्ध अंग्रेज इतिहास लेखक विन्सेंट स्मिथ ने भी अपनी पुस्तक अकबर दी ग्रेट मुगल में निकोलो मनूची के उल्लेख की पुष्टि करते लिखा है कि औरंगजेब जब दक्षिण में मराठा युद्ध में सलंग्न था मथुरा क्षेत्र के उपद्रवी जाटों ने सम्राट अकबर का मकबरा तोड़ डाला। उसकी कब्र खोदकर उसके अवशेष अग्नि में जला डाले। इस प्रकार अकबर की अंतिम आंतरिक इच्छा की पूर्ति हुई। आगरा सूबा में नियुक्त मुगल सेनाधिकारियों से राजाराम का दमन नहीं किया जा सका, तो बादशाह ने आंबेर के राजा बिशनसिह को,जिसका पिता राजा रामसिह उन्ही दिनों में मृत्यु को प्राप्त हुए थे मथुरा का फौजदार बनाकर जाटों के विरुद्ध भेजा। राजा बिशनसिह उस समय नाबालिग था सो लांबा का ठाकुर हरिसिह उसका अभिभावक होने के नाते सभी कार्य संचालित करता था। ठाकुर हरीसिह ने ही खंडेला के राजा केसरी सिह जो खुद भी बाद में औरंगजेब का विद्रोही बना और शाही सेना से युद्ध करता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ था।

अटल जी ने दिया था सबसे पहले आरक्षण
1998 में पूर्व प्रधानमंत्री इन्दर कुमार गुजराल की सरकार के वक्त पिछड़ी जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में जाटों को शामिल किए जाने की सिफारिश की थी। लेकिन गुजराल सरकार ने इन सिफारिशों पर ध्यान नहीं दिया। अगस्त 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ओबीसी श्रेणी के तहत जाटों को आरक्षण देने, राजस्थान के जाटों को पिछड़े वर्ग का दर्जा देने का वादा किया। भाजपा ने राज्य में 25 सीटों में से 16 जीती। इस प्रकार जाट आरक्षण के राजनीतिकरण की शुरुआत हुई। अक्टूबर 1999 में बाजपेयी सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में राजस्थान के जाटों को आरक्षण देने के अपने वादे को पूरा दिया। इसके बाद, अन्य राज्यों में भी जाटों को आरक्षण की मांग शुरू हो गई। 2००4 के लोकसभा चुनावों के दौरान, जाटों के लिए आरक्षण के वादे को एक बार फिर राजनीतिक दलों ने हवा दी। चुनावों के बाद आरक्षण की मांगों को बल नही मिला, तब छोटे आंदोलन और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
9 मार्च 2००7 को दिल्ली में अखिल भारतीय जाट महासभा के सम्मेलन में जाट आरक्षण की मांग उठाई गई। इस बार सम्मलेन में कई केंद्रीय और राज्य के मंत्रियों और सांसदों ने भाग लिया, जिसके कारण यह सम्मलेन अधिक महत्वपूर्ण था। चौधरी यशपाल मलिक ने जाट आरक्षण की मांग के लिए लड़ने के के लिए अखिल भारतीय जाट महासभा से अलग अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति का गठन किया। अपनी स्थापना के बाद से ही संगठन ने कई विरोध प्रदर्शनों और रैलियों का आयोजन किया है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने हिसार से 15 किलोमीटर दिल्ली हाइवे पर मय्यड़ गांव में जाम लगाया। देश भर में 62 जगहों पर रेलवे व हाइवे पर प्रदर्शन हुए।
देश भर के 15 रेलवे ट्रैक के पास धरने पर बैठे थे जाट समुदाय के लोग
पुलिस ने भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनकारियों को उठाया गया। लोगों ने इसका विरोध किया। लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, पथराव। मय्यड़ गांव के संदीप कड़वासरा की गोली लगने से मौत। शव को रेलवे ट्रैक पर रख कर जाट समुदाय ने आंदोलन किया।

हरियाणा में सरकार ने जाटों को 1० प्रतिशत अलग से आरक्षण में शामिल किया
संसद के बजट सत्र के दौरान जंतर-मंतर पर देश भर में 55 जगहों पर धरने की शुरूआत 31 मार्च तक 55 जगहों पर धरना व जंतर-मंतर पर लगातार 1० मई 2०13 तक संसद के बजट सत्र की समाप्ति तक धरना जारी रहा। बाद में आंदोलन के दौरान जिनकी मौत हुई उनके नाम पर शहादत दिवस का आयोजन करके राष्ट्रीय स्तर की रैली का आयोजन हुआ और 3० अक्टूबर तक आरक्षण ना मिलने पर दिल्ली, राजस्थान व मध्य प्रदेश में जाटों से कांग्रेस को वोट ना देने का संकल्प का आहवान। केंद्रीय मंत्रीमंडल की ओर से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को 9 राज्यों के जाटों की आरक्षण की मांग पर राज्यों के आधार पर दी सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया। मार्च 2०14 को राष्ट्रीय चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने से एक दिन पहले यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार ने जाट समुदाय के लिए आरक्षण को मंजूरी दे दी। अप्रैल 2०14 में जाटों को दिया गया अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कोटा देने से केंद्र को रोकने के लिए मना कर दिया। 17 मार्च 2०15 को सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी में जाटों को शामिल करने के केंद्र सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया और कहा कि सिर्फ जाति ही आरक्षण का आधार नहीं हो सकती। हांलाकि बाद में नरेंद्र मोदी सरकार ने भी सिद्धांत रुप से जाट आरक्षण का समर्थन किया है और अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।