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मंगलवार, 28 दिसंबर 2010

10:26 am

दिग्विजय का दागी इतिहास

हिन्दू आतंकवाद के प्रणेता दिग्विजय सिंह जी मध्यप्रदेश के राघो गढ़ के राजा अजीत सिघ जी के वंशज हैं जो कि अंग्रेजो के चाटुकार के रूप में जाने जाते हैं .१९०४ में राघोगढ़ सिंधिया राजतन्त्र के अधीन हो गया .राघोगढ़ के राजा बहादुर सिंह भी अंग्रेज शासन कर्ताओ के मुरीद थे और उनकी दिली इच्छा थी कि वो अंग्रेजो कि तरफ से प्रथम विश्व युद्ध में लड़ते हुए मार दिए जाय ..इसीप्रकार १८५७ के विद्रोह के समय भी राघोगढ़ अंग्रेजो के साथ मिलकर भारतीयों का दमन कर रहा था और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का विरोध कर रहा था ।
यह तो एक संछिप्त इतिहास था झाबुआ के नवापाड़ा में २२/१२/१९९८ को कुछ इसाई ननो के साथ बलात्कार हुआ उस समय दिग्विजय सिंह जी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे और इसाई ननो के बलात्कार के लिए हिन्दू संगठनों को दोषी करार दिए .जबकि जाँच एगेंसियो ने पाया कि मतांतरित इसाईयों ने यह बलात्कार किया हैं। यही नही अगले विधान सभा चुनाव में दिग्विजय सिंह जी ने उन्ही बलात्कारी इसाईयों को अपनी पार्टी का टिकट दिया। उनके मुख्य मंत्री रहते सोम डिस्टिलरी से घूस लेने का आरोप उनके ऊपर लगा भाजपा और दूसरी पार्टियों द्वारा जब वे बुरी तरह घेर लिए गए तो तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का गुणगान करने लगे थे। तब वह सरस्वती शिशु मंदिरों के समर्थक बन गए थे। और अब बटाला के आतंकियों से लेकर अजमल कसाब कि पैरवी करने लगे,आजमगढ़ तक आतंकी पाकपरस्त लोग से मिलने गए, और शिशुमंदिर नफ़रत के बीज बोने लगे दिग्विजय जी कि नज़र में, ,हिन्दू आतंकी हो गए?
वैसे यहाँ पर बता देना ठीक रहेगा कि शिशु मंदिरों कि प्रशासनिक संस्था विद्या भारती के अनुसार पूरे देश में २४ हजार शिशु मंदिर हैं ,जिसमे ३१ लाख शिशु पढ़ते हैं ,जिनमे ४५ हजार शिशु मुस्लिम समुदाय के ही हैं। इसके अलावा ५ हजार इसाई बच्चे भी शिशु मंदिरों के छात्र हैं ,लगभग १ लाख ३७ हजार आचार्य कार्यरत हैं। जहाँ सरकारी तंत्र नही पहुँच पाया हैं वहां ८० हजार गावों में शिशु मंदिर बच्चो के पढने कि व्यवस्था करता हैं। क्या यह सब दिग्विजय जैसे लोगो को नही पता ? जो लोग भारत माता के अपमान पर चुप रहते हो और कांग्रेस माता के अपमान पर सीना पीट पीट कर मातम मनाते हो उनसे क्या उम्मीद करना ?---मार्कन्डेय पाण्डेय