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शनिवार, 4 जून 2011

12:46 am

स्वामी अग्निवेश का दिवालियापन

कभी किसी ने कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह जी को कहा था कि यह नाटो दिग है नही विजयी , वैसे ही स्वामी अग्निवेश नही स्वामी है नही अग्निवेश, आज कल दोनों एक साथ जुगलबंदी कर रहे है । कभी कन्या भरुद हत्या के खिलाफ अभियान चलने वाले स्वामी अग्निवेश को अमर नाथ यात्रा दोंग लगाती है और कुछ कठमुल्लों को साथ लेकर वन्देमातरम ना गए जाने का अभियान चलाये हुए है। लोकपाल बिल पर अनाप शनाप बकने के बाद यह तथाकथित स्वामी पागल हो गया है। जिस आर्य समाज का यह स्वामी है काश कि आज स्वामी दयानंद होते तो इसकी कारगुजारियों से आहात होते । स्वामी दयानंद के दर्शन और स्वामी अग्निवेश के राजनीत प्रेरित बयानों में कोई साम्य नही है। अब बात करे दिग्विजय सिंह जी कि तो कुछ दिनों पूर्व जाब ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में मारा गया तो डेल्ही में एक प्रेस कान्फरेन्स में दिग्विजय सिंह ने कहा ओसामा जी पाकिस्तान में रह रहे थे , एक मोस्ट वांटेड आतंकी को जी कहना , जो दुनिया और मानवता का दुश्मन है यह वोट बैंक कि गिरावट और चाटुकारिता कि हद है। उनके बगल में इलाहाबाद विश्वविद्यालय कि मध्य कालीन विभाग कि प्रोफ़ेसर और उत्तर परदेश कांग्रेस कि अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी भी चाटुकारिता में सर हिला रही थी । जिसे मिडिया के द्वारा सारे देश ने देखा। राष्ट्रवादियो को गाली देना और भारत द्रोहियों को जी कहाँ यह कांग्रेस नेताओ का संस्कार है।
मार्कन्डेय पाण्डेय