शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

कुरान, इस्‍लाम और जेहाद का वैश्विक चरित्र

इसमें किसी को शक नहीं होना चाहिए कि इस्लामिक जेहाद की खूनी घटनाएं किसी एक देश तक सीमित हैं। इसका चरित्र वैश्विक है। यह जेहादी आतंकवाद लगातार बढ़ रहा है। इसके चरित्र का गहराई से अध्‍ययन करें तो भारत गत हजार साल से इस इस्‍लामिक जेहाद के निशाने पर है। हां अमेरिका के लिए 9 नवंबर को विश्व व्यापार केन्द्र को ध्वस्त करने की घटना, इस्लामिक आतंकवाद की पहली घटना अवश्‍य हो सकती है। भारत में तो इसका लम्बा इतिहास एक गत हजार सालों का हैं। विश्व प्रसिद्ध इतिहासकार 'विल डूरन्ट' ने लिखा है− भारतीय इतिहास का मुस्लिम काल, विश्व इतिहास का सर्वाधिक खूनी अध्याय रहा है।
हम आतंक की घटनाओं से सबक नहीं लेते। हम इतिहास से भी सबक नहीं लेते। हमारा पक्का विश्वास है कि सभी धर्म एक तरह के हैं। इंसानियत का सबक सिखाते हैं। लेकिन ऐसा है क्या? इस्लामिक धर्मग्रंथ कुरान, अल्लाह पर ईमान नहीं रखने वाले को अविश्वासी मानता है। ईसाई, जीसस के प्रति निष्ठा नहीं रखने वालों को अविश्वासी मानता है। यह दोनों विश्वासियों और अविश्वासियों में फर्क करते हैं। ईसाई मानते हैं कि गैर−ईसाइयों को नर्क में जाना पड़ेगा। कुरान के अनुसार अविश्वासियों को अल्लाह पर ईमान लाने के लिए हर तरफ से पूरा प्रयास करना चाहिए। और ऐसे प्रयासों में तलवार से मौत के घाट उतार देना भी शामिल है। विश्वासियों और अविश्वासियों में कहीं कोई बराबरी नहीं हो सकती।


आज दुनिया भर मे जो है, इन्हीं दोनों धर्मों के अपने−अपने अविश्वासियों के साथ हिंसाचार के कारण है। यहां कुरान को मानने वाले जेहादी आतंकवादियों की चर्चा हो रही है। जो हिंसक जेहाद में विश्वास नहीं करता, जेहादी उसे पक्का मुसलमान नहीं मानते। वैसे कुरान में कुल मिलाकर 6000 से ऊपर आयतें हैं। इसमें अनेक परस्पर विरोधी बातें भी हैं। इस्लामिक धर्मशास्त्र भी है। खण्डन−मण्डन भी है। जीवन−मृत्यु और फैसले का दिन, कानून, युद्ध का आह्वान वगैरह भी है। इसके अलावा पैगम्बर मोहम्मद साहब की जीवनी भी है। हिंसाचार के प्रोत्साहन वाले कुरान सम्मत आदेशों को जेहादी अविश्वासियों के खिलाफ सबसे अधिक तरजीह देते हैं। इसके लिए जान को कुर्बान कर देना अपना पवित्र कर्तव्य मानते हैं। कुरान में इस तरह के बलिदान की बड़ी महिमा है। ऐसे जेहादियों की संख्या, 100 करोड़ से अधिक मुसलमानों में मुश्किल से कुछ लाख होगी। यह सारे संसार को इस्लाम के झंडे तले लाने के लिए समर्पित हैं। फिदायीन हमले करने वाले ऐसे ही जेहादी होते हैं।

वैसे आमतौर पर मनुष्य शांति चाहने वाला प्राणी होता है। मुसलमानों में भी अधिकतर लोग शांति चाहने वाले ही होते हैं। जेहादियों में भले ही कुर्बानी का जज्बा हो, मगर कुरान के बहुत से आदेशों के वह उल्लंघन करने के दोषी होते हैं। हिंसक रास्ते के कारण उनका प्रभाव ज्यादा पड़ता है। अपनी हिंसक क्षमता के कारण वह अपनी बातें बहुत से मुसलमानों से मनवा लेते हैं। इसीलिए हम देखते हैं कि जेहादी निशाने पर कई बार बड़ी संख्या में मुसलमान स्वयं होते हैं। पाकिस्तान में तो मुस्लिम आबादी ही है। दूसरे धर्मों के नाम मात्र के लोग हैं। लेकिन वहां जेहादी हिंसा कम नहीं है, बल्कि पाकिस्तान तो आज विश्व भर के इस्लामिक आतंकवादी की जन्म−भूमि और पनाह−भूमि मानी जाती है। जहां तक भारत का सवाल है, यहां एक प्रतिशत मुसलमान भी अतिवादी इस्लामिक मत के नहीं हैं। लेकिन आतंकवाद की गतिविधियों को अंजाम देने के लिए मुट्ठी भर लोग और कुछ स्थानीय सहायक काफी होते हैं। आज इस्लामिक आतंकवादियों ने सिर्फ जम्मू−कश्मीर और मुम्बई वगैरह में ही नहीं, करीब−करीब सारे देश में अपना एक व्यापक तंत्र बना लिया है। इनके पनाहगार भी हैं और समर्थक भी।
भारत में अनेक मुसलमानों है जो संसार की हालत को अपनी यात्राओं के कारण जानते हैं और यह मानते हैं कि भारत के मुसलमान दुनिया में सबसे अधिक शांति और सम्मान से जी रहे हैं। तर्क इस जेहाद को परास्त कर देगा, अगर भारत में वोट बैंक की राजनीति करने वाले दल उन्हें अनुकूल वातावरण बनाने दें। मगर ये राजनैतिक दल तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति का रास्ता छोड़ने वाले नहीं हैं।