शनिवार, 12 मार्च 2011

कैसे आती है सुनामी ?




जापान के उत्तर पूर्वी इलाकों में भूकंप के बाद जबरजस्त सुनामी आई है। इससे पहले २००४ में साऊथ ईस्ट एशियाई देशों में भी भूकंप के बाद सुनामी या समुद्री हलचल से बड़ी तबाही हुई थी। समुद्र में उठी कई मीटर ऊँची लहरों को सुनामी कहा जाता है वास्तव में सु यानि समुद्र तट और नामी मतलब लहरें यह जापानी भाषा का ही शब्द है।
समुद्र के भीतर अचानक बड़ी तेज हलचल होने लगे उफान उठने लगे ,लम्बी ऊँची लहरों का रेला उठाने लगे, जबरजस्त आवेग के साथ आगे बढने लगे तो इसको सुनामी कहा जाता है। पहले सुनामी को समुद्र के अन्दर उठने वाले ज्वार के रूप में लिया जाता था। लेकिन हकीकत में ऐसा नही है। दरअसल समुद्र में लहरे चाँद सूरज और ग्रहों के प्रभाव के कारण उनके गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के कारण उठती है। लेकिन सुनामी लहरें इन आम लहरों से अलग होती हैं। इसके पीछे कई कारण होते है लेकिन सबसे ज्यादा असरदार कारण है भूकंप । जमीन धसने, ज्वालामुखी विस्फोट, उल्कापात से भी सुनामी आ सकती है।
सुनामी लहरें समुद्र तटीय इलाकों पर भीषण तरीके से हमला करती है जिसमे जान मॉल का भारी नुकसान होता है। भूकंप या सुनामी कि कोई सटीक भविष्यवाणी नही हो सकती, लेकिन सुनामी के अब तक के रिकार्ड और महाद्वीपों कीस्थिति के आधार पर धरती कि जो प्लेट या परतें जहाँ जहाँ मिलती है वहा के आस पास के समुद्र तट में सुनामी का खतरा ज्यादा रहता है। जैसे आस्ट्रेलियाई परत और युरेसियाई परत जहाँ मिलती है वहां इस्थित है सुमात्रा जो कि दूसरी तरफ फिलिपीन परत से जुड़ा हुआ है। सुनामी लहरों का कहर वहां भयंकर रूप से देखा जाता है।
किसी भीषण भूकंप कि वजह से समुद्र कि उपरी परत अचानक खिसक कर आगे सरक जाती है तो समुद्र अपनी समान्तर स्थिति में आगे बढने लगता है। जो लहरें उस वक्त बनती है वो सुनामी लहरें होती हैं। धरती कि उपरी परत फुटबाल कि तरह आपस में जुडी हुई है या एक अंडे कि तरह जिसमे दरारे हो । अंडे का खोल सख्त होता है,लेकिन उसके भीतर का पदार्थ लिजलिजा होता है। भूकंप के असर से ये दरारे चौड़ी होकर अन्दर के पदार्थ में इतनी हलचल पैदा करती है कि वो तेजी से ऊपर कि तरफ का रुख कर लेता है.धरती कि परतें जाब भी किसी असर से चौड़ी होती हैं तो वो खिसकती है जिसके कारण महाद्वीप बनते है तो इस तरह सुनामी लहरें बनती है। लेकिन ये भी जरुरी नही कि हर भूकंप से सुनामी लहरें बने ही, इसके लिए भूकंप का केंद्र समुद्र के आसपास या भीतर होना चाहिए । जब ये सुनामी लहरें किसी भी महाद्वीप कि उस परत के उथले पानी तक पहुंचती है जहाँ से वो दुसरे महाद्वीप से जुड़ा है और जो कि एक दरार के रूप में देखा जा सकता है वहां सुनामी लहर कि तेजी कम हो जाती है।
वह इसलिए क्योकि उस जगह दूसरा महाद्वीप भी जुड़ा रहता है और वहां धरती कि जुडी हुई परत कि वजह से दरार जैसी जो जगह होती है वो पानी को अपने अन्दर रास्ता दे देती है , लेकिन उसके बाद भीतर के पानी के साथ मिलकर जब सुनामी किनारे कि तरफ बढती है तो उसमे इतनी तेजी होती है कि वो ३० मीटर तक ऊपर उठ सकती है और अपने रास्ते में पेड़, जंगल या इमारते कुछ भी हो सबका सफाया कर देती है।

markandey pandey

गुरुवार, 10 मार्च 2011

कैसे तैयार होता है बजट

केंद्र सरकार कि आर्थिक नीतियों को तय करने का काम बजट के द्वारा सरकार का एक कोर ग्रुप तय करता है। इस कोर ग्रुप में प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्री और वित्तमंत्रालय के अधिकारी होते है । साथ ही योजना आयोग भी शामिल होता है। वित्त मंत्रालय प्रशासनिक स्तर पर वित्त सचिव, राजस्वा सचिव, व्यय सचिव, यह कोर ग्रुप सदैव वित्त मंत्रालय के सलाहकारों के नियमित संपर्क में रहते है। वैसे इस कोर ग्रुप का दांचा सरकारों के साथ बदलता भी रहता है।

बजट पर नियमित बैठकों में वित्त सचिव, राजस्वा सचिव, व्यय सचिव, बैंकिंग सचिव, संयुक्त सचिव बजट के अलावा केंद्रीय सीमा एवम उत्पाद शुल्क बोर्ड के चेयरमैन हिस्सा लेते है। वित्त मंत्री को बजट पर मिलने वाले योजनाओं और खर्चों के सुझाव वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग को भेज दिए जाते है , जबकि टैक्स से जुड़े सारे सुझाव वित्त मंत्रालय कि टैक्स रिसर्च यूनिट को भेज दिया जाता है।

इस यूनिट का प्रमुख एक संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी होता है। प्रस्ताओं और सुझावों के अध्ययन के बाद ये यूनिट कोर ग्रुप को अपनी अनुशंसा भेजते है। पूरी बजट निर्माण प्रक्रिया का समन्वय का कार्य वित्त मंत्रालय का संयुक्त सचिव स्तर का एक अधिकारी करता है। बजट के निर्माण से लेकर बैठकों के समय तय करने और बजट कि छपाई तक सारे कार्य इसी अधिकारी के जरिये होते है।

बजट निर्माण कि प्रक्रिया को इतना गोपनीय रखा जाता है कि संसद में पेश होने तक इसकी भनक किसी को ना लगे। इस गोपनीयता को सुनिश्चित करने के लिए वित्त मंत्रालय के नार्थ ब्लाक स्थित दफ्तर को बजट पेश होने के कुछ दिन पहले एक अघोषित कैद खाने में तब्दील कर दिया जाता है। बजट कि छपाई से जुड़े लोगों को दिनरात पुलिस और सिक्योरिटी एजेंसियों के कड़े पहरे में रहना पड़ता है। बजट के दो दिन पहले नार्थ ब्लाक में वित्त मंत्रालय के हिस्सा पूरी तरह सिल कर दिया जाता है। यह सब वित्त मंत्री के बजट भाषण के पूरा होने तक और वित्त विधेयक रखे जाने तक चलता है।

मार्कन्डेय पाण्डेय

बुधवार, 9 मार्च 2011

बजट कि कुछ अच्छी बातें

विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाने कि चुनौतियों के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुख़र्जी ने देश का ८० वां बजट प्रस्तुत किया , ऐस तो बजट चाहे कितना अच्छा रहता हो विरोधी पार्टी हमेशा आलोचना ही करती रही है, लेकिन प्रतेक बजट में कुछ अच्छी बाते भी होती है। कुलमिलाकर ८० वां बजट कुछ खास तो नही लेकिन हर साल का बजट अच्छा ही हो यह देश के दीर्घकालीन हित के लिए जरुरी हो भी सकता है नही भी हो सकता है।
इस बजट में जो खास बाते मुझे दिखाई देती है वह यह कि इनकम टैक्स में छुट दिया गया और एक्साईज ड्यूटी बडाई गई जिससे निवेश बढेगा और खपत काम होगी। पर्यावरण को ध्यान में रखा गया है और हाई ब्रिड करोण और सिएफेल को ध्यान में रख कर सस्ता किया गया। शेयर बाजार में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन दिया गया है मुचुअल फंड में विदेशी निवेसकों को धन लगाने कि छुट दी गई है इससे देश के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। वेतनभोगियों को कर छुट १ लाख ६० हजार से बदकार १ लाख ८० हजार किया गया है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह द्वारा मिलाने वाले कर्ज को बढाया गया है । डायरेक्ट टैक्स कोड को लागु करने कि योजना है और एक्साईज और कस्टम ड्यूटी में भी सुधर किया जा रहा है। काले धन के खिलाफ पहले सरकारी विभागों कि स्वातंत्र आडिट हो ऐसा कदम उठाने के संकेत मिले है।
घर के लिए कर्ज देने वाली संस्थान को टैक्स फ्री बांड जारी करने कि छुट दी गयी है । कृषि पर व्याज कि सब्सिडी ज्यादा कि गयी है कोल्ड स्टोरेज के लियर भी कर्ज को आसान किया गया है। रक्षा बजट को ११ फीसदी बढाया गया है जो महंगाई को देखते हुए वास्तविक वृद्धि नही है ।
बजट कि सबसे खास विशेषता है रसोई गैस और किरोसिन तेल पर सरकार कि सब्सिडी निति अब यह सरकार नगद देने जा रही है , समाजवादी राज्य के उलट उदारीकरण के बाद सरकार कि सब्सिडी निति में यह एक क्रांतिकरी परिवर्तन के संकेत है ।
मार्कन्डेय पाण्डेय
०९ मार्च २०११