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लाइफ स्टाइल में चेंज से भी बढ़ती है इम्यूनिटी दूब घास और अश्वगंधा है सबसे बड़ा एंटी ऑक्सीडेंट

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साल भर से अधिक समय से लोगों ने काढ़ा, हल्दी, गिलोय और तुलसी आदि का प्रयोग शुरू कर दिया है ताकि वह अपनी इम्यूनिटी बढ़ा सकें और कोरोना महामारी का सामना कर सके. इम्यूनिटी बढ़ने से ना केवल कोरोना महामारी से लड़ने में मदद मिलती है बल्कि शरीर को अन्य बीमारियों से भी सुरक्षित रखने में सहारा मिलता है. इम्यूनिटी के बारे में कहा जाता है कि यह बच्चों और बुजुर्गों में कम होता है जबकि युवा लोगों में इम्यूनिटी अधिक होता है. जिसके कारण वह रोगों की चपेट में आने से बच जाते हैं. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जहां देशी मसाले जिनमें अजवाइन, लौंग, हल्दी, काली मिर्च, अदरक आदि का लोग प्रयोग कर रहे हैं, तो वही जानकारों का कहना है कि उचित आहार-विहार करके अपने लाइफ स्टाइल में परिवर्तन करके भी इम्यूनिटी को बढ़ाया जा सकता है. आधुनिक मेडिकल विज्ञान सिर्फ शारीरिक इम्युनिटी बढ़ाने की बात करता है. जबकि आयुर्वेद में तीन प्रकार के इम्यूनिटी की बात की गई है जिसमें पहली इम्यूनिटी शारीरिक होती है. दूसरी मानसिक होती है जबकि तीसरी आध्यात्मिक इम्यूनिटी होती है. यदि हम भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार उचित आहार-विहार करें तो यह तीन

कीट किसान के दुश्मन नहीं -खरीफ फसलों में हानिकारक कीड़ों को मारने से पहले मित्र कीटों को पहचान

सीसीएस हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के पूर्व निदेशक, मानव संसाधन प्रबंधन और कीट विज्ञान विभाग के प्रमुख रहे प्रख्यात कीट विज्ञानी प्रोफेसर राम सिंह ने किसानों और प्रकृति के हित में अपने अनुभव साझा किए। मनुष्य ने कीटों को या तो उनके मित्रों या शत्रुओं में विभाजित किया, जबकि प्रकृति माँ की दृष्टि में सभी जीवों को समान मूल्य के साथ जीने का समान अधिकार है। कुछ कीट जैसे मधुमक्खियां, रेशम कीट, लाख कीट या परागणक उपयोगी कीट कहलाते हैं क्योंकि उनके उत्पाद मनुष्य के लिए लाभकारी होते हैं । लेकिन साथ ही जब कोई मधुमक्खी कॉलोनी किसी व्यक्ति के घर के आसपास बसने की कोशिश करती है, तो वह व्यक्ति या तो व्यवस्था करेगा इस कॉलोनी को खदेड़ दें या काटे जाने या उपद्रव के डर से कीटनाशक स्प्रे से नष्ट करवा देगा । उसके पास विकल्प है कि जरूरत पड़ी तो बाजार से शहद खरीद लेंगे । लेकिन उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि अगर मधु मक्खियों जैसे परागणकर्ता विलुप्त हो जाते हैं तो इस ग्रह पर मनुष्य का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। मनुष्य के छोटे बच्चे टिड्डे, भृंग, तितलियों जैसे कीड़ों के साथ खेलते हैं क्योंकि उन्हें ऐ

आंदोलन की फसल काटने को बेताब नेता

दिसंबर अंत में रिलांयस ग्रुप ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर किया और न्यायालय से गुहार लगाई कि हरियाणा-पंजाब में हमारे आउटलेट, टॉवर, व्यापार केंद्रों आदि पर हमले हो रहे हैं, नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिससे हमारे हजारों कर्मचारी परेशान हैं। हमारे इन केंद्रों की सुरक्षा के लिए सरकार व पुलिस को निर्देशित करने की हम याचना करते हैं। साथ ही हमारे ऊपर लग रहे आरोप कि हम कांट्रैक्ट फार्मिंग करते है और वर्तमान कृषि कानूनों से हम करार खेती शुरु कर देंगे, यह अफवाह है। हम शपथ पूर्वक कहते है कि रिलायंस से जुड़ी कोई भी संस्था जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, रिलायंस इंफो, जीओ आदि देश में कहीं भी कांट्रैक्ट खेती नहीं करती ना हाल फिलहाल ऐसा करने की कोई योजना है। इस याचिका के तकरीबन सप्ताह भर पहले अडानी समूह ने देश के प्रमुख समाचार पत्रों में बड़े और साफ शब्दों में विज्ञापन देकर प्रकाशित कराया और कहा कि वर्तमान कृषि कानूनों को लेकर हमारे ऊपर लगने वाले आरोप निराधार है। इसका हम खंडन करते हैं। दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली को घेर कर दो माह से बैठे किसान कहे जाने वाले आंदोलनकारी लगातार यह माला जप रहे