संदेश

जनवरी 10, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चौथी औद्यौगिक क्रांति के लिये हम कितने तैयार हैं

सबसे पहले तो सिक्कीम मणिपाल विश्वविद्यालय के छात्रों को हार्दिक बधाई। मणिपाल विवि के छात्रों ने सौर उर्जा से चलने वाली कार का निर्माण सफलतापूर्वक किया है। इससे पहले हम सौर उर्जा के लिये सोलर लाईट, सोलर कूकर, सोलर लैंप आदि से अधिक नहीं आगे बढ पाये थ्ो। हांलाकि कुछ प्रदेशों और शहरों में सौर उर्जा से विद्युत सप्लाई के यदा-कदा प्रयास भी दिखाई देने लगे हैं। दुनियां में जिन देशों को सर्वाधिक सौर उर्जा प्रा’ है, उनमें भारत का भी एक स्थान है किंतु इस क्ष्ोत्र में आज भी हम अपेक्षित प्रयास करते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं। सौर उर्जा से चलने वाला यात्री विमान आगामी दिसंबर माह में नई दि“ी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अडडे पर प्रदर्शन के लिये उतरेगा। यह विमान सौर उर्जा से चलने वाला विश्व का पहला विमान होगा। स्वीटरजरलैंड में सबसे पहले इस विमान की निर्माता कंपनी सोलर इम्पल्स ने जब इसे तैयार किया तो राईट बंधुओं के पहले विमान की याद तााजा हो गई। यह सोलर एयरोप्लेन शुरुआत म्ों काफी धीमी गति से उड़ान भर रहा था लेकिन वैज्ञानिकों ने दावा किया कि जल्दी ही आधुनिक विमानों की रफतार यह पकड़ लेगा। मजे की बात यह कि भूगोल क