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तकनीकी आधारित जॉब में बूम का इंतजार

ऑनलाइन कंपनीज, सॉफ्टवेयर में शिफ्ट होगी इकोनॉमी पढ़ाई और कोर्सेज में भी होगा व्यापक बदलाव दुनिया में लाखों नौकरियों पर कोरोना का ग्रहण लगा हुआ है, इसकी काली छाया दूर होते ही आईटी सेक्टर से लेकर ऑनलाइन बिजनेस करने वाली कंपनियों में रोजगार का बूम आने वाला है. इतना ही नहीं एजुकेशन सिस्टम में भी क्रांतिकारी परिवर्तन अगले कुछ वर्षों में देखने को मिलेंगे. प्रोफेशनल कोर्सेज सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से लेकर वेबसाइट डेवलपमेंट, इक्विपमेंट डेवलपमेंट जोकि हेल्थ, एजुकेशन से लेकर फार्मा और आईटी बेस्ड होंगें जैसे एवेन्यूज पर हमारा एजुकेशन सिस्टम आगे बढ़ेगा. किन क्षेत्रों में बढ़ेगा एजुकेशन ऑनलाइन शॉर्ट टर्म कोर्सेज स्किल बेस्ड ट्रेनिंग ऑनलाइन प्रोग्राम इवेंट मैनेजर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट हेल्थ फार्मा आईटी बेस्ड जॉब्स तकनीकी आधारित जॉब लॉक डाउन के दौरान जब वर्चुअल माध्यम से एजुकेशन सिस्टम चलाने की कोशिश की जा रही थी यह भी देखा गया कि यूनिवर्सिटी यूट्यूब चैनल वेबसाइट विजिट करने वालों बाढ़ आ गई. महज सवा साल में ही लखनऊ यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को तीन करोड़ लोगों ने विजिट किया जिसमें फॉरेनर्स की भी अच्छी खासी

लाइफ स्टाइल में चेंज से भी बढ़ती है इम्यूनिटी दूब घास और अश्वगंधा है सबसे बड़ा एंटी ऑक्सीडेंट

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साल भर से अधिक समय से लोगों ने काढ़ा, हल्दी, गिलोय और तुलसी आदि का प्रयोग शुरू कर दिया है ताकि वह अपनी इम्यूनिटी बढ़ा सकें और कोरोना महामारी का सामना कर सके. इम्यूनिटी बढ़ने से ना केवल कोरोना महामारी से लड़ने में मदद मिलती है बल्कि शरीर को अन्य बीमारियों से भी सुरक्षित रखने में सहारा मिलता है. इम्यूनिटी के बारे में कहा जाता है कि यह बच्चों और बुजुर्गों में कम होता है जबकि युवा लोगों में इम्यूनिटी अधिक होता है. जिसके कारण वह रोगों की चपेट में आने से बच जाते हैं. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जहां देशी मसाले जिनमें अजवाइन, लौंग, हल्दी, काली मिर्च, अदरक आदि का लोग प्रयोग कर रहे हैं, तो वही जानकारों का कहना है कि उचित आहार-विहार करके अपने लाइफ स्टाइल में परिवर्तन करके भी इम्यूनिटी को बढ़ाया जा सकता है. आधुनिक मेडिकल विज्ञान सिर्फ शारीरिक इम्युनिटी बढ़ाने की बात करता है. जबकि आयुर्वेद में तीन प्रकार के इम्यूनिटी की बात की गई है जिसमें पहली इम्यूनिटी शारीरिक होती है. दूसरी मानसिक होती है जबकि तीसरी आध्यात्मिक इम्यूनिटी होती है. यदि हम भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार उचित आहार-विहार करें तो यह तीन

कीट किसान के दुश्मन नहीं -खरीफ फसलों में हानिकारक कीड़ों को मारने से पहले मित्र कीटों को पहचान

सीसीएस हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के पूर्व निदेशक, मानव संसाधन प्रबंधन और कीट विज्ञान विभाग के प्रमुख रहे प्रख्यात कीट विज्ञानी प्रोफेसर राम सिंह ने किसानों और प्रकृति के हित में अपने अनुभव साझा किए। मनुष्य ने कीटों को या तो उनके मित्रों या शत्रुओं में विभाजित किया, जबकि प्रकृति माँ की दृष्टि में सभी जीवों को समान मूल्य के साथ जीने का समान अधिकार है। कुछ कीट जैसे मधुमक्खियां, रेशम कीट, लाख कीट या परागणक उपयोगी कीट कहलाते हैं क्योंकि उनके उत्पाद मनुष्य के लिए लाभकारी होते हैं । लेकिन साथ ही जब कोई मधुमक्खी कॉलोनी किसी व्यक्ति के घर के आसपास बसने की कोशिश करती है, तो वह व्यक्ति या तो व्यवस्था करेगा इस कॉलोनी को खदेड़ दें या काटे जाने या उपद्रव के डर से कीटनाशक स्प्रे से नष्ट करवा देगा । उसके पास विकल्प है कि जरूरत पड़ी तो बाजार से शहद खरीद लेंगे । लेकिन उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि अगर मधु मक्खियों जैसे परागणकर्ता विलुप्त हो जाते हैं तो इस ग्रह पर मनुष्य का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। मनुष्य के छोटे बच्चे टिड्डे, भृंग, तितलियों जैसे कीड़ों के साथ खेलते हैं क्योंकि उन्हें ऐ

आंदोलन की फसल काटने को बेताब नेता

दिसंबर अंत में रिलांयस ग्रुप ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर किया और न्यायालय से गुहार लगाई कि हरियाणा-पंजाब में हमारे आउटलेट, टॉवर, व्यापार केंद्रों आदि पर हमले हो रहे हैं, नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिससे हमारे हजारों कर्मचारी परेशान हैं। हमारे इन केंद्रों की सुरक्षा के लिए सरकार व पुलिस को निर्देशित करने की हम याचना करते हैं। साथ ही हमारे ऊपर लग रहे आरोप कि हम कांट्रैक्ट फार्मिंग करते है और वर्तमान कृषि कानूनों से हम करार खेती शुरु कर देंगे, यह अफवाह है। हम शपथ पूर्वक कहते है कि रिलायंस से जुड़ी कोई भी संस्था जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, रिलायंस इंफो, जीओ आदि देश में कहीं भी कांट्रैक्ट खेती नहीं करती ना हाल फिलहाल ऐसा करने की कोई योजना है। इस याचिका के तकरीबन सप्ताह भर पहले अडानी समूह ने देश के प्रमुख समाचार पत्रों में बड़े और साफ शब्दों में विज्ञापन देकर प्रकाशित कराया और कहा कि वर्तमान कृषि कानूनों को लेकर हमारे ऊपर लगने वाले आरोप निराधार है। इसका हम खंडन करते हैं। दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली को घेर कर दो माह से बैठे किसान कहे जाने वाले आंदोलनकारी लगातार यह माला जप रहे

नींद में खलल पड़ी तो ईराकी ने आठवीं मंजिल से फेंका दो माह के पालतू

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 ईराकी नागरिक ने आठवीं मंजिल की बालकनी से फेंका   वन्यजीव कार्यकर्ता ने एफआईआर के लिए विभिन्न सरकारी महकमों से लगाई गुहार   दो से तीन माह के पप्पीज (कुत्ते के बच्चों) को एक ईराकी नागरिक ने सिर्फ इस लिए आठवीं मंजिल की बालकनी से नीचे फैंक दिया क्यों कि उसके नींद में खलल पड़ रही थी। मामला सेक्टर 65 के एमार एमराल्ड बिल्डिंग का है जहां टॉवर डी के आठवी मंजिल पर ईराकी नागरिक सैफ अजहर अब्दुल हुसैन अल नाजी रहता है। उक्त व्यक्ति दो से तीन माह की उम्र के दो कुत्ते के बच्चों को पाल रखा था, आज सुबह सात बजे जब वह सो रहा था तो उन छोटे कुत्तों ने भौंकना शुरु कर दिया। कुत्ते के बच्चों के भौकनें के कारण ईराकी नागरिक के नींद में खलल पड़ा और उसने बेरहमी से बिल्डिंग के आठवीं मंजिल से उन मासूमों उठा कर फैंक दिया। सुबह करीब सात बजे यह घटना घटी जिसके बाद जब उक्त बिल्डिंग लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई तो ईराकी नागरिक दरवाजा बंद करके सो गया। इस बारें में जब वन्य जीवों को लेकर कार्य करने वाली कार्यकर्ता संगीता डोगरा को पता चला तो वह संबंधित थाने में जीवजंतु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की गुहार लगाने

बाबा रामदेव को अरावली की जमीन देना चाहती है सरकार?

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कांग्रेस के जयराम रमेश ने शून्य काल के दौरान उठाया मुददा  फरीदाबाद के कोट गांव की सामलात भूमि बेचने का आरोप  मार्कण्डेय पाण्डेय  अरावली की चार सौ एकड़ जमीन को अवैध तरीके से बेचने का मामला संसद में गरमा गया है। कांग्रेस के जयराम रमेश ने शून्य काल के दौरान इस मुददे को मीडिया रिर्पोट के हवाले से उठाते हुए कहा है कि साल 2014 से 2016 के बीच राजनैतिक रसूख के बल पर एक प्राईवेट इंटरप्राईज ने अरावली के कॉमन लैंड को खरीद लिया है। रमेश ने कहा कि जो जमीन बेची गई है वह सुप्रीम कोर्ट के 1996 के आदेश के मुताबिक वन भूमि है जिसे बेचा अथवा खरीदा नहीं जा सकता। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2011 के आदेश के मुताबिक सभी ग्राम समाज की सम्मिलित भूमि जिन पर किसी प्रकार का अतिक्रमण किया गया है उसे खाली कराकर उसे ग्राम पंचायत को सौंपा जाना चाहिए। जिससे उक्त जमीनों का सार्वजनिक तौर पर ग्राम समाज उपयोग कर सके। यदि सर्वोच्च न्यायालय के इन आदेशों को देखा जाए तो अरावली की जमीन खरीदने वाले ने न्यायालय की अवहेलना की है। संसद में शून्य काल में हरियाणा सरकार के पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट में संशोधन के मुददें

गांव की गायों का दूध भी नहीं पीते लोग

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युवकों से विवाह नही करना चाहता कोई, रिश्तेदार भी आने से हिचकते हैं प्लास्टिक और कचरा खाकर मर रही है गायें, पसरता जा रहा है कैंसर  मार्कण्डेय पाण्डेय अरावली की हरी-भरी गोद में बसे बंधवाड़ी गांव में रोजी रोटी का मुख्य साधन पशुपालन है। गांव के दर्जनों ऐसे लोग है जो पशुपालन करते हैं और शहरी क्षेत्रों में दूध बेचते हैं। जैसे ही शहरी लोगों को पता चलता है कि गांव का पानी जहरीला हो गया है, तब से उन्होंने दूध लेना बंद कर दिया है। कुछ समय पहले तक गांव के लोग दूध लेकर शहर जाते थे। महज दो-तीन पशुपालकों का ही करीब 125 किलो दूध बिना बिके वापस आ गया। शहर में लोगों ने उनका दूध लेने से साफ इनकार कर दिया। खत्ते की पॉलिथीन और कचरा खाने से गाय और भैंसें मर रही हैं। अब दूध की बिक्री बंद या कम होने से रोजी रोटी पर भी संकट आ गया है। गांव के बहुत से लोगों ने अब बीमारियों से बचने के लिए 25 रुपये में 20 लीटर पानी खरीदकर पी रहे हैं। विकास और आधुनिकता बंधवाड़ी के लिए अभिशाप बन गया है, जहां दर्जनों लोग कैंसर से जूझ रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ पशुधन कचरा खाकर मर रहा है। यहां तक कि बंधवाड़ी और इसके आसपास क