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फ़रवरी 17, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पेट्रोल से 25 गुना अधिक प्रदूषण छोड़ती हैं डीजल कारें

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 गुड़गांव सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लगातार बढ़ते प्रदूषण में सर्वाधिक योगदान डीजल वाहनों का है। यह खुलासा एक संस्था के शोध में हुआ है जिसने हवा में जहरीले तत्वों का अध्ययन किया है। इंटरनैशनल सेंटर फॉर आॅटोमोटीव टेक्नालाजी नामक संस्था की ओर से किए गए सर्वे में पाया गया है कि एक एसयूवी डीजल कार उतना ही नाईट्रोजन के आक्साईड का उत्सर्जन करती है जितना कि 25 पेट्रोल चालित कारें करती हैं। हांलाकि गुड़गांव की बात करें तो यहां पर तकरीबन 40,000 से 60,000 डीजल चालित ऑटो अबभी सड़कों पर जहर उगल  रहे हैं जो गुड़गांव सहित पूरे एनसीआर के ही प्रदूषण में योगदान दे रहे हैं। देश की साईबर सिटी कहे जाने वाले शहर का दम प्रदूषण से घूंटता रहा है। लोगों में न केवल सांस की तकलीफ बल्कि मनोरोग की शिकायते  समाने आने लगी हैं। समय के साथ वाहनों की संख्या में जहां लगातार बढोत्तरी हुई है तो वहीं ट्रैफिक जाम, वाहनों से निकलने वाले धुंए ने साईबर सिटी का दम घोंट दिया है। प्रदूषण को रोकने के लिए किया जा रहा प्रशासन की कोशिशें •ाी नाकाफी हैं। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुपालन में जगह-

जेनरेटर उगलने लगे धूंवा

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10,000 डीजल जनरेटर तो 40,000 डीजल आटो शहर की फिजा को करेंगे जहरीला   देश की साईबर सिटी और मिलेनियम शहर का तमगा हासिल करने वाले शहर की जमीनी हकीकत कुछ अलग ही कहानी बयां करती है। विकास की बहुमंजिली इमारतों की चकाचौंध, मल्टीनैशन का हब कहे जाने वाला लटकों-झटकों का शहर प्रदूषण का हब बनता जा रहा है। तकरीबन 10,000 से अधिक डीजल जेनरेटर, 40 हजार से अधिक डीजल वाहनों और डीजल संयत्रों से लगातार बढता प्रदूषण साइबर शहर को नारकीय बनाते जा रहे हैं।  व्यावसायिक और घरेलू प्रयोग को लेकर सरकारी स्तर पर जो आंकड़ें हैं उनके अनुसार शहर में डीजल से चलने वाले 10,500 जनरेटर हैं तो वहीं तकरीबन 40,000 आॅटो वाहन डीजल से •ााग रहे हैं। इन मशीनी इंजिनों से निकलने वाला धूंआ न केवल गुड़गांव शहर की हवा को विषाक्त कर रहा है बल्कि पूरे एनसीआर की आबादी के लिए ही खतरा बनता जा रहा है। मजे की बात यह कि गुड़गांव से सटे दिल्ली में दशक •ार पहले ही जहां डीजल वाहनों पर रोक लगा दिया गया और सीएनजी की शुरुआत कर दी गई थी तो मिलेनियम शहर कहे जाने वाले गुड़गांव में आज •ाी पुराने ढर्रे और कानून ही चलाए जा रहे हैं। यहां न तो डीजल वाहनों

प्रदूषण से मौत की राजधानी बन रहा है एनसीआर

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बुजुर्ग और बच्चों सहित गर्भवती माताएं आ रही चपेट में  धूल, धूवें के कारण 112 ग्राम से कम वजन के बच्चे पैदा हो रहे हैं सीएसई ने अपने वार्षिक रपट में किया खुलासा   गुलाबी सर्दियों की शुरुआत जब हो रही थी तभी सर गंगाराम अस्पताल के बाहर कृत्रिम फेफड़ा प्रयोग के लिए लगाया गया। नवंबर 2018 के हल्की सर्दी के दौरान ही यह महज 48 घंटे में ही सफेद से काला हो गया। सिर्फ फेफड़ा ही नहीं, प्रदूषण और जहरीली हवाओं से मानव के कई अंग घायल हो रहे हैं और एनसीआर प्रदूषण से मौत के मामले में दुनियां की राजधानी बनता जा रहा है। जहरीली हवा, वाहनों के शोर, कूंड़े के पहाड़ और लगातार प्रदूषित होते भूजल के कारण प्रदूषण जनित बीमारियां लोगों की जिंदगी लील रही है। दूसरी तरफ प्रदूषण से बचाव के सरकारी प्रयास राजधानी दिल्ली में तो किए गए है लेकिन प्रदूषण के उत्सर्जन करने वाले कारकों में कोई कमी नहीं आई बल्कि वे एनसीआर के दूसरे हिस्से गुडग़ांव, फरीदाबाद, नोयडा सहित बल्लभगढ़ में शिफ्ट हो गए हैं। जिसके कारण राजधानी दिल्ली समेत पूरा एनसीआर एक त्रासदी की ओर आगे बढ़ रहा है। पर्यावरण, प्रदूषण और वन्यजीवों पर शोध करने वाली सं

भूमाफियाओं और बिल्डरों का चारागाह बन जाएगी अरावली

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पंजाब भूमि संरक्षण कानून में संशोधन से पसर जाएंगे बिल्डर खत्म हो जाएगा एनसीआर के भूजल रिचार्ज का सबसे बड़ा स्रोत   60 हजार एकड़ अरावली खतरे में, 16 हजार एकड़ गुडग़ांव में तो 10 हजार एकड़ फरीदाबाद में इसी माह संशोधित के लिए पीएलपीए को रखा गया है विधानसभा में देशभर में जितनी हरियाली है उसकी तुलना में हरियाणा में 4 फीसद से भी कम बची है। बावजूद इसके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को आक्सीजन देने और भूमिगत जल को रिचार्ज करने वाली अरावली पर बिल्डरों की नजर है तो सरकार भी इसे लेकर गंभीर नहीं दिखाई देती। पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट 1900 जिससे अरावली अपनी प्राणवायु हासिल कर जिंदा रही है उसे ही संशोधित करने के लिए सरकार ने विधानसभा में रख दिया है। इस एक्ट के तहत और सुप्रीम कोर्ट के 2002 और 2004 के निर्णय के अनुसार नोटिफाईड एरिया को फारेस्ट एरिया माना जाता है। कोर्ट ने एमसी मेहता केस में भी 2008 व 2009 में इसी बात को दोहराया है। गुडग़ांव जिले में अरावली के 16930 एकड़ भूमि जो कि 38 गांवों के अंतर्गत आती है इसी पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट के नोटिफिकेश के अंर्तगत तहत आता है। इसीतरह फरीदाबाद जिले में 1

बीते दशक में एनसीआर दुनियां की प्रदूषण राजधानी बनी

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साल 2008-2018 के दौरान लगातार जहरीली हुई एनसीआर की हवा   साल 2008 से लेकर 20018 के दौरान राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर की हवा जहरीली होती गई है और यह दुनियां में प्रदूषण की राजधानी बनकर उभरी है। इतना ही नहीं यहां पर प्रदूषण से मौत के मामले भी देश के दूसरे हिस्सों के मुकाबले अब्बल है। प्रदूषण की सबसे बड़ी मार जहां बुजुर्गो पर पड़ रही है तो वहीं पांच साल से छोटे बच्चों से लेकर गर्भवती महिलाएं भी इससे अछूती नहीं है। केंद्रीय भूविज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली संस्था सफर इंडिया के सालाना रिर्पोट में प्रदूषण के इन आंकड़ों का खुलासा हुआ है। सेंटर फॉर साईंस एंड एंवायरमेंट (सीएसई)की वार्षिक मीडिया कांक्लेव में दिल्ली-एनसीआर सहित देश के विभिन्न शहरों में वायु गुणवत्ता, प्रदूषण के विभिन्न स्तर व प्रकार, स्वच्छता, सहित भूजल और वन्यजीवों पर आंकड़ों को जारी किया गया है। हांलाकि जारी किए गए रिर्पोट में यह भी कहा गया है कि सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर किए गए प्रयासों के कारण पीएम 2.5 स्तर में मामूली स्तर भी हुआ है। वर्ष 2008 से लेकर बीते साल 2018 के दौरान दिल्ली और एनसीआर के दूसरे

हवा में जहर घोल रहे डीजल ऑटो

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पंद्रह से बीस साल पुराने ऑटो दौड़ रहे हैं गुड़गांव में   शहर में डीजल से चलने वाले 4० हजार से अधिक ऑटो दिनरात हवा में जहर घोल रहे हैं और प्रदूषण रोकने के तमाम कवायदों पर पानी फेर रहे हैं। शहर में वायु प्रदूषण का स्तर 4०० पीएम 2.5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच चुका है। तो वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगातार तीन साल से गुड़गांव को देश का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर घोषित कर रखा है। प्रदूषण के कारणों में बड़ा कारण किसानों की ओर से जलाई जाने वाली पराली को बताया जा रहा है जबकि पराली जलाने से महज 5 फीसद प्रदूषण में इजाफा होता है। जबकि हवा में जहरीले तत्वों की मात्रा में इजाफा करने के लिए यातायात जाम और हजारों की तादात में कंडम डीजल ऑटो का बड़ा योगदान है। उल्लेखनीय है कि गत दो वर्ष पूर्व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने डीजल ऑटो बंद करने की सिफारिश सरकार के पास भेजी थी। यहां तक कि वर्ष 2०17 में सरकार की ओर से घोषणा भी की गई थी कि एनसीआर से सटे हरियाणा के शहरों में डीजल से चलने वाले ऑटो बंद कर दिए जाएंगे। जिन वाहनों में सीएनजी नहीं होगा उनको नहीं चलने दिया जाएगा। लेकिन सरकार