जेनरेटर उगलने लगे धूंवा


10,000 डीजल जनरेटर तो 40,000 डीजल आटो शहर की फिजा को करेंगे जहरीला 
 देश की साईबर सिटी और मिलेनियम शहर का तमगा हासिल करने वाले शहर की जमीनी हकीकत कुछ अलग ही कहानी बयां करती है। विकास की बहुमंजिली इमारतों की चकाचौंध, मल्टीनैशन का हब कहे जाने वाला लटकों-झटकों का शहर प्रदूषण का हब बनता जा रहा है। तकरीबन 10,000 से अधिक डीजल जेनरेटर, 40 हजार से अधिक डीजल वाहनों और डीजल संयत्रों से लगातार बढता प्रदूषण साइबर शहर को नारकीय बनाते जा रहे हैं।
 व्यावसायिक और घरेलू प्रयोग को लेकर सरकारी स्तर पर जो आंकड़ें हैं उनके अनुसार शहर में डीजल से चलने वाले 10,500 जनरेटर हैं तो वहीं तकरीबन 40,000 आॅटो वाहन डीजल से •ााग रहे हैं। इन मशीनी इंजिनों से निकलने वाला धूंआ न केवल गुड़गांव शहर की हवा को विषाक्त कर रहा है बल्कि पूरे एनसीआर की आबादी के लिए ही खतरा बनता जा रहा है। मजे की बात यह कि गुड़गांव से सटे दिल्ली में दशक •ार पहले ही जहां डीजल वाहनों पर रोक लगा दिया गया और सीएनजी की शुरुआत कर दी गई थी तो मिलेनियम शहर कहे जाने वाले गुड़गांव में आज •ाी पुराने ढर्रे और कानून ही चलाए जा रहे हैं। यहां न तो डीजल वाहनों पर रोक हैं ना ही दिल्ली की तरह डीजल चालित जेनरेटरों पर कोई रोक है। यहां तक कि आंतरिक परिवहन में आॅटो चालकों की मनमानी •ाी नहीं रुकी है और बिना किसी मीटर के मनमाना किराया वसूली जारी है। अब इस शहर का दम प्रदूषण की चपेट में आकर घुटने लगा है। प्रदूषण के कारण पर्यावरण की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। जिसके कारण लोगों में न केवल सांस की तकलीफ बल्कि मनोरोग की शिकायते •ाी समाने आने लगी हैं।
शहर में साढे दस हजार के आसपास जनरेटर वि•िान्न गतिविधियों में प्रयोग हो रहे हैं। जिनसे हवा में तकरीबन 6 फीसदी पीएम 2.5 स्तर में बढोत्तरी हो रही है, तो वहीं पीएम10 स्तर में दस फीसदी की बढोत्तरी हो रही है। इतना ही नहीं, डीजल वाहनों और जनरेटरों से निकलने वाले धूंआ के कारण वातावरण में कार्बन के आक्साईड सहित नाईट्रोजन के वि•िान्न तरह के जहरीले पदार्थ घुल रहे हैं।
गैरलाइसेंसी जनरेटर का डाटा उपलब्ध नहीं
शहर में तकरीबन 900 से अधिक आवासीय सोसायटियां हैं जिनकी उर्जा जरुरतों में जनरेटर का प्रयोग •ाी शामिल है। व्यावसायिक संस्थान तो प्रयोग करते ही हैं, आवासीय क्षेत्रों में •ाी धडल्ले से प्रयोग किया जाता है। ऐसे जनरेटर तकरीबन साढे दस हजार है जो लाईसेंस प्राप्त करके चलाए जा रहे हैं, जबकि चोरी-छिपे और बिना अनुमति के चलाए जाने वाले जनरेटरों की कितनी संख्या है, इसका कोई निश्चित आंकड़ा मौजूद नहीं है।

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