संदेश

नवंबर 18, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वैकल्पिक उर्जा का कोई विकल्‍प नहीं, जीवाश्‍म ईधन से बने बिजली

अगर भारत चाहे तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये बगैर कोयला और पेट्रोलियम से बनने वाली बिजली से खुद को मुक्‍त कर सकता है। वैकल्पिक उर्जा के जरिये निश्चित रुप से भविष्‍य में भारत विकास और समृद्धि की नई कहानी लिख सकता है और ऐसा करते समय उसे अपने जंगलों को नुकसान पहुंचाने की भी जरुरत नहीं होगी। पर्यावरण को लेकर अतंरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कार्य करने वाली संस्‍था ग्रीन पीस का यह कहना है। संस्‍था ने ग्‍लोबल विंड इनर्जी काउंसिल और द यूरो‍पियन रिनेबल इनर्जी के साथ मिलकर किये गये संयुक्‍त शोध के बाद भारत की उर्जा जरुरतों को वैकल्पिक माध्‍यमों से पूरा करने का एक खाका तैयार किया है। रिर्पोट को तैयार करते समय देश के सामाजिक और आर्थिक तानेबाने को देखते हुए कहा गया है कि भारत अपनी उर्जा की आवश्‍यक्‍ताओं को लंबे समय तक कैसे बिना पर्यावरण हो नुकसान पहुंचाये पूरा कर सकता है। गैर सरकारी संगठन ग्रीन पीस के वरिष्‍ठ अधिकारी अभिषेक कहते हैं कि हाल में ग्रिड फेल होने की घटनाओं ने संकेत दिया है कि जीवाश्‍म या कोयले पर आधारित उर्जा भरोसे के काबिल नही हैं और यह कभी भी सारे सिस्‍टम को ठप कर सकती है। उल्‍लेखनी