वैकल्पिक उर्जा का कोई विकल्‍प नहीं, जीवाश्‍म ईधन से बने बिजली



अगर भारत चाहे तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये बगैर कोयला और पेट्रोलियम से बनने वाली बिजली से खुद को मुक्‍त कर सकता है। वैकल्पिक उर्जा के जरिये निश्चित रुप से भविष्‍य में भारत विकास और समृद्धि की नई कहानी लिख सकता है और ऐसा करते समय उसे अपने जंगलों को नुकसान पहुंचाने की भी जरुरत नहीं होगी। पर्यावरण को लेकर अतंरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कार्य करने वाली संस्‍था ग्रीन पीस का यह कहना है।
संस्‍था ने ग्‍लोबल विंड इनर्जी काउंसिल और द यूरो‍पियन रिनेबल इनर्जी के साथ मिलकर किये गये संयुक्‍त शोध के बाद भारत की उर्जा जरुरतों को वैकल्पिक माध्‍यमों से पूरा करने का एक खाका तैयार किया है। रिर्पोट को तैयार करते समय देश के सामाजिक और आर्थिक तानेबाने को देखते हुए कहा गया है कि भारत अपनी उर्जा की आवश्‍यक्‍ताओं को लंबे समय तक कैसे बिना पर्यावरण हो नुकसान पहुंचाये पूरा कर सकता है। गैर सरकारी संगठन ग्रीन पीस के वरिष्‍ठ अधिकारी अभिषेक कहते हैं कि हाल में ग्रिड फेल होने की घटनाओं ने संकेत दिया है कि जीवाश्‍म या कोयले पर आधारित उर्जा भरोसे के काबिल नही हैं और यह कभी भी सारे सिस्‍टम को ठप कर सकती है।
उल्‍लेखनीय है कि देश में तीस करोड़ आबादी ऐसी है जिससे अभी तक बिजली के दर्शन नहीं हुए हैं। उसे हम जीवाश्‍म उर्जा के भरोसे छोड भी दें तो बिजली से चलने वाले कारोबार की दशा भी बदतर है और गत वित्तिय वर्ष का सात फीसद नुकसान उर्जा की समुचित आपूर्ति न होने के कारण हुआ है। अगर जीडीपी आधारित अर्थव्‍यवस्‍था को सही पटरी पर चलाते रहना है तो भारत को पर्यावरण हितैषी उर्जा को बढावा देना ही होगा तभी जाकर कार्बन उज्‍सर्जन पर भी प्रभावी रोक लगाया जा सकेगा। देश में जिस उर्जा उत्‍पादन प्रणाली में पूंजी निवेश किया जा रहा है उस पर पुर्नविचार करने की आवश्‍यक्‍ता है।
अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍थाओं ने अपने अध्‍ययन में कहा है कि भारत में वैकल्पिक उर्जा प्रणालियों में निजी और सरकारी स्‍तर पर 2050 तक 610000 करोड़ रुपये निवेश करने की आवश्‍क्‍यता है। इस निवेश के कारण भारत को जीवाश्‍म ईधन पर खर्च किये जाने वाले सालाना एक ट्रीलीयन धनराशि की बचत होगी और वर्ष 2020 तक 24 लाख नये रोजगार का अवसर सामने आयेगा। यदि भारत सरकार वैकल्पिक उर्जा के क्षेत्र में कदम आगे बढाती है तो 2050 तक 95 फीसदी भारती उर्जा की आपूर्ति वैकल्पिक स्रोतों से हो जायेगी और यह सबसे सस्‍ती उर्जा होगी। रिर्पोट के अनुसार 2050 तक प्राकृतिक स्रोत से प्राप्‍त उर्जा की कीमत साढे तीन रुपये प्रति यूनिट होने का अनुमान है।
इतना ही नहीं, ग्‍लोबल विंड एनर्जी काउंसिल का कहना है कि भारत स्‍थानीय उर्जा बाजार में अपने लिये 54 हजार करोड़ से अधिक का कारोबार भी विकसित कर सकता है। इस रिर्पोट का दावा है कि आगामी 2030 तक भारत में रोजगार के क्षेत्र में चौदह गुना की बढोत्‍तरी हो सकती है यदि भारत इन उपायों पर अमल करे तो, वहीं विश्‍व में पवन उर्जा के क्षेत्र में भारत को सर्वाधिक संभावनाओं वाला देश बताया गया है। हांलाकि भारतीय योजना आयेग ने बारहवी पंचवर्षीय योजना अवधि में पवन उर्जा के जरीये 15 हजार मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्‍य पहले ही निर्धारित कर रखा है।

टिप्पणियाँ

  1. Pandayji namaskar, natural energy sources ke sath sath yadi mannual power ( family) ka bhi use electricity produce karne main kiya jaye to kai 21st century ke un expected rog diabetes arthritis digestion disorder etc se bacha ja sakta hai sath hi in bimariyon ke treatment par kharch hone vala million dollars ka apvyay bachaya ja sakta hai.

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