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गुरुवार, 16 जून 2011

2:41 pm

निगमानंद का असली हत्यारा कोन

स्वामी निगमानंद जी के ब्रम्हालीन होने पर मैंने सुना और पढ़ा की कुछ कांग्रेस नेता और पत्रकार यह लिख रहे है की निशंक ने उनकी जन ले ली. भाजपा की सरकार है और उसने मार डाला. यदि यह सत्य है तो दूसरा सत्य यह भी है की ऐसा कहने और लिखने वाले भी उतने ही बड़े हत्यारे है .. सबसे पहले तो निगमानंद के हत्यारों को भारत के संविधान में तलास करना होगा, संविधान के अनुसूचीयों नदी, जल विवाद , बांध इत्यादी केंद्र के जिम्मे आते है इस विषय में राज्य सरकार क्या कर सकती है? स्वामी निगमानंद जी ने गंगा को लेकर आमरण अनशन किया इसमें केंद्र की सरकार को ही हस्तछेप करना चाहिए था. जहाँ तक भाजपा की वहां पर सरकार का सवाल है या निशंक जी का तो निश्चित रूप से उनकों इस विषय में चुप नहीं रहना चाहिए था. चुप रहना जितना बड़ा अपराध है उतना बड़ा अपराध पुरे देश ने किया है.

इसका एक पहलु यह भी है की मिडिया अनहोनी को, नकारात्मक को खोजता है निगमानंद जी स्टार नहीं थे , मिडिया में नहीं थे , बाबा रामदेव जी की तरह मिडिया फ्रेंडली नहीं थे, मिडिया वालों विशेस कर चैनल वालो की खुसामद या अपने अनशन को फेसबुक तक नहीं ला पाए , प्रायोजित नहीं कर पाए, मार्केटिंग न करके वास्तव में एक संत की तरह प्राण त्याग दिए . यही गलती हुए मिडिया को भी अपने गिरेबान में झाकना चाहिए... नए नए चिकने चिकने लड़के लड्किया जो सस्ते में कमरा लेकर भागने के लिए दिहाड़ी करने के लिए उपलब्ध है , जो अनेक बार विषय की गंभीरता नहीं समझ पाते . उनको सिर्फ ग्लिमर दीखता वही सबकुछ है ... उनके लिए मुठ्टी भर नेता के सिवा देश में और कुछ नहीं दिखाई देता .

जो लोग जल और पानी का फर्क नहीं जानते , उन्हें गंगा और गड्डे में भी फर्क दिखाई नहीं देता. भारत और इंडिया उनके लिए सिर्फ अनुवाद है और कुछ नहीं. ..

मैं इन्ही शब्दों के साथ गत आत्मा की शांति की प्रार्थना करता हूँ और अपनी विनम्र श्रधांजलि देता हूँ .

मार्कंडेय पाण्डेय