सोमवार, 8 जुलाई 2013

विदेशियों की नजर में भारत

2 फरवरी सन 1833 को ब्रिटीश पार्लियामेंट में लार्ड मैकाले कहता है कि अपने 17 साल के भारत प्रवास दौरान मैने एक भी आदमी को गरीब और बेरोजगार नही देखा, भीख मांगना तो दूर की बात है। फ्रांस का इतिहासकार फ्रांसवा पियाड अपनी पुस्तक में लिखता है कि भारत में 36 प्रकार के उद्योग है और भारत दुनियां को हर चीज निर्यात करता है। इसीप्रकार स्काटलैंड का विद्धान मार्टिन कहता है कि इटली के राजा-रानी भारत के बने हुए कपडे पहनते हैं और हमें भी कोशिश करनी चाहिये कि भारत के कपडें मिल जायें। मद्रास प्रेसिडेंसी का गर्वनर रहा थामस मूनरो 1813 में ब्रिटेन की संसद में कहता है कि भारत में इतनी बारीक कपडे की बुनाई होती है कि तेरह गज का थान आप एक अंगूठी से बाहर निकाल सकते हैं। मैने कपडों को तौला है कुछ थान तो दस ग्राम से कम हैं जिनको तोला और रत्ती में तौलना पडता है। थामस मूनरो इसी वक्‍तव्‍य में भारत की आर्थिक स्थिति का लेखा-जोखा ब्रिटेन की संसद में देते हुए बताता है कि सारी दुनियां में जो माल का उत्पादन होता है उसका अकेला भारत ही 43 फीसदी करता है, सारी दुनियां में जो निर्यात होता है उसमें भारत का निर्यात 33 फीसदी है तो पूरे विश्व की आमदनी का 37 फीसदी अकेला भारत के पास है। थामस मूनरो, जी डब्लू लिटनेस, कैंपवेल और डॉ स्काट अलग-अलग स्रोतों से कहते हैं कि सर्जरी के लिये सबसे श्रेष्ठतम औजार भारतीय स्टील के बनाये जाने चाहिये। 1711 में डेनियल डिफो कहता है कि कापरनिक्स के पैदा होने के एक हजार साल पहले ही भारत के आर्यभटट ने पता कर लिया था सूर्य के बारे में, सूर्य के साथ अन्य ग्रहों के अंर्तसंबंधों के बारे में भारतीय काफी पहले ही शोध कर चुके थे। तो सवाल खडा होता है कि क्या भारत बिना शिक्षा और विज्ञान-तकनीकि के यह सब कर पाया होगा ? जर्मन चिंतक मैक्‍समूलर और लूडलो, अलग-अलग आंकडों मे 1822 में बताते है कि भारत में 7 लाख 32 हजार गांव है और सभी गांवों में गुरुकुल है। यहां सामान्य बच्चे जो पांच साल की आयु पूरी कर लेते हैं, गुरुकुल भेज दिये जाते हैं जहां 18 विषय सूर्योदय से सूर्यास्त तक 14 वर्षो तक पढाया जाता है। इन विषयों में संस्कृत माध्यम है और वेद उपनिषद बच्चों के नैतिक और सांस्कृतिक स्तर को बनाये रखने के लिये पढाये जाते हैं जबकि नक्षत्र विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, धातु विज्ञान, वैदिक गणित, रसायन शास्र् , ज्योतिष, आर्युवेद आदि की शिक्षा दी जाती है। इन गुरुकुलों में शिक्षा निश्शुल्क है जहां राजकुमार से लेकर सामान्य, बालक साथ-साथ पढते हैं। 1868 तक इग्लैंड में सामान्य बच्चों के लिये शिक्षा का कोई प्रबंध नही और उनके आदर्श राजनैतिक विचारकों सहित अरस्तू और सुकरात तक सामान्य बच्चों को शिक्षा दिये जाने के खिलाफ इसे स्पेशल स्तर तक ही सीमित रखते हैं ।