असमिया मधुमख्यियों का शहद है सेहत का खजाना

लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध में बिना डंक वाली असमिया मधुमक्खियों पर खुलासा हुआ है।
बीपी, सुगर, टाइफॉयड, पेचिश, संकमण से लेकर दंतरोगों में बेहद कारगर है। 
पूर्वोत्तर के आसाम की बिना डंक वाली मधुमक्खियों का शहद सेहत का खजाना है। इसमें आधुनिक जीवन शैली जनित रोगों का उपचार छुपा हुआ है साथ ही टायफॉयड, पेचिश और दंतरोगों के संक्रमण में इसका सेवन आश्चर्यजनक रुप से लाभदायक है। लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोध में बिना डंक वाली असमिया मधुमक्खियों के शहद में सर्वाधिक एंटी आक्सीडेंट होने का खुलासा हुआ है। विश्वविद्यालय के डॉ. प्रदीप कुमार ने असमिया मधुमक्खियों के शहद का वैज्ञानिक और चिकित्सकीय परीक्षण कर इस सुखद तथ्य को प्रमाणित किया है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के इस अध्ययन में असम के शहद के स्वास्थ्य लाभ उजागर किए गए हैं। यह शोध आसाम एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों व प्रोफेसरों के सहयोग से किया गया। अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित जर्नल फ्रंटियर ऑफ न्यटीशन (डम्पैक्ट फैक्टर: 5.1) में प्रकाशितकिया गया है। इस अध्ययन में आसाम की विभिन्न मधुमक्खी प्रजातियों द्वारा उत्पादित शहद का पहला व्यापक जैव रासायनिक तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। शोधकर्ताओं ने एपीस सेरेना, एपीस मेलीफेरा, एपीस डोरास्टा और बिना डंक वाली मधुमक्खी ट्रेट्रागोनुला इरीडीपेन्निस के शहद का अध्ययन किया। 
जिसमें पारंपरिक उपयोग और सीमित वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण के कारण स्टिंगलेस बी शहद पर विशेष अध्ययन किया गया है। एंज़ाइम, अमीनो अम्ल, खनिजों की मात्रा अधिक अध्ययन के प्रमुख निष्कर्षों से पता चला कि ट्रेट्रागोनुला इरीडीपेन्निस (स्टिंगलेस बी) का शहद एंज़ाइम, अमीनो अम्ल, आवश्यक खनिजों और पौध उत्पन्न जैवसक्रिय यौगिकों की मात्रा में अन्य शहदों की तुलना में कहीं अधिक समृद्ध है। इसमें फेनोलिक और फ्लेवोनॉइड्स की मात्रा सर्वाधिक पाई गई। ये शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट ऑक्सीडेटिव तनाव, सूजन और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से सुरक्षा में सहायक माने जाते हैं।
प्रयोगशाला अध्ययनों में उच्च एंटीऑक्सीडेंट सक्रियता और टाइफॉयड, पेचिश, गले के संक्रमणसक्रियता और टाइफॉयड, पेचिश, गले के संक्रमण व दंत रोगों के लिए जिम्मेदार रोग जनकों के विरुद्ध व्यापक जीवाणुरोधी प्रभाव प्रदर्शित किया। इनविट्रो अध्ययनों में प्रयोगात्मक परिस्थितियों में कोशिका जीवितता में कमी भी देखी गई, जो इसकी मजबूत एंटीऑक्सीडेंट क्षमता को दर्शाती है। यद्यपि इसे औषधीय उपचार के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है, फिर भी यह अध्ययन इसे एक फंक्शनल फूड के रूप में रेखांकित करता है, जो आहार में शामिल होने पर प्रतिरक्षा और समग्र स्वास्थ्य को सहारा दे सकता है।
डॉ. प्रदीप के 200 से अधिक शोध प्रकाशन डॉ. प्रदीप कुमार माइक्रोबायोलॉजी, फाइटोकेमिकल्स, फंक्शनल फूड्स और जैव-सक्रिय प्राकृतिक उत्पादों के क्षेत्र के शोधकर्ता हैं। उनके नाम 200 से अधिक शोध प्रकाशन हैं। उन्होंने दक्षिण कोरिया और इज़राइल में अंतरराष्ट्रीय शोध किया है। वैज्ञानिक महत्व के साथ-साथ यह अध्ययन सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत प्रासंगिक है।

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