ऋगवेद, गीता और मानस भी गणित पर आधारित
..... देता न दशमलव भारत तो यूं चांद पर जाना मुश्किल था, धरती और चांद की दूरी का अंदाज़ा लगाना मुश्किल था... पूरब और पश्चिम फिल्म के इस गाने को देश के प्रख्यात गणितज्ञ प्रो. आर बालासुब्रमण्यम गुनगुना कर बताते हैं कि ऋगवेद की ऋचाओं से लेकर गीता और रामचरित मानस तक गणित के सिद्धातों पर आधारित है। ज्यामितीय से लेकर रेखाचित्र तक, यज्ञवेदी से लेकर हवनकुंड तक में गणित शास्त्र का प्रयोग किया गया है। दशमलव, शून्य से लेकर अनंत तक गणित के अनेक सिद्धांत भारत की देन है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के गणित विभाग में आयोजित 72वें भारतीय गणित परिषद में देश-विदेश के विज्ञानों का दो दिनों तक जमघट लगा रहा। चेन्नई स्थित परमाणु उर्जा विभाग के पूर्व निदेशक प्रो. आर बालासुब्रमण्यम ने गणित विषय को लेकर बातचीत की उन्होंने कहा कि गणित को भारतीय भाषाओं में पढ़ाया जाना चाहिए। 2006 में पदमश्री से पुरस्कृत बालासुब्रमण्यम कहते हैं कि गणित ही है जो हमे तार्किकता से सोचना सीखाती है। उन्होंनें त्रिपाठी, चतुर्वेदी जैसे नामों पर भी वेद के श्लोकों के गणितीय पाठ से जोड़ा। वह कहते है कि आधुनिक समय में गणित ने काफी सकारात्मक विकास किया है जिसके बिना कोई भी विज्ञान काम कर ही नहीं सकता।
रामचरित मानस पर आयोजित हुआ सत्र श्रीरामचरित मानस के बालकांड के दोहा क्रमांक 234 के बाद दी गई चौपाई को लेकर मंथन हुआ।
जय जय गिरबरराज किशोरी, जय महेश मुख चंद्र चकोरी, जय गजबदन षडानन माता, जगत जननि दामिनी दुति गाता। इसीप्रकार हनुमान चालीसा में भी सूर्य की दूरी की गणना की गई है। जबकि वैदिक गणित तो अथर्ववेद से ही उत्पन्न हुआ है। गीता के प्रत्येक श्लोक को चार क्वाटर में विभाजित करके अनुष्टप छन्द के अनुसार आठ-आठ अक्षरों से बना है।अष्टाध्यायी व पिंगला महर्षि के शास्त्र गणित पर बंगलौर से आए गणितज्ञ प्रो. सीएस अरविंद कहते हैं कि दशमलव प्रणाली, शून्य और अनंत सहित पाणिनी के अष्टाध्यायी और महर्षि पिंगल के शात्र में 4 हजार गणितीय सूत्रों का उल्लेख किया गया है। मैथ कमजोर है, तो छात्र नहीं शिक्षक जिम्मेदार पश्चिम बंगाल से आए गणित के विद्वान प्रो. यूसी डे, प्रो सीएस अरविंद और प्रो. आर बालासुब्रमण्यम ने एकमत होकर कहा कि गणित दुरुह विषय नहीं है। यदि इसे लेकर छात्र भयभीत है तो इसके लिए छात्र नहीं, शिक्षक जिम्मेदार है। जो उसे रुचिकर ढंग से पढ़ा नहीं पाते। आज गणित की मांग विभिन्न क्षेत्रों में है जैसे आर्थिक गणित, क्रिप्टोलॉजी, बायोटेक, कंम्प्यूटर से लेकर रोबोट, ड्रोन और एआई तक हर क्षेत्र में इसकी मांग है।
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