कैसे आती है सुनामी ?




जापान के उत्तर पूर्वी इलाकों में भूकंप के बाद जबरजस्त सुनामी आई है। इससे पहले २००४ में साऊथ ईस्ट एशियाई देशों में भी भूकंप के बाद सुनामी या समुद्री हलचल से बड़ी तबाही हुई थी। समुद्र में उठी कई मीटर ऊँची लहरों को सुनामी कहा जाता है वास्तव में सु यानि समुद्र तट और नामी मतलब लहरें यह जापानी भाषा का ही शब्द है।
समुद्र के भीतर अचानक बड़ी तेज हलचल होने लगे उफान उठने लगे ,लम्बी ऊँची लहरों का रेला उठाने लगे, जबरजस्त आवेग के साथ आगे बढने लगे तो इसको सुनामी कहा जाता है। पहले सुनामी को समुद्र के अन्दर उठने वाले ज्वार के रूप में लिया जाता था। लेकिन हकीकत में ऐसा नही है। दरअसल समुद्र में लहरे चाँद सूरज और ग्रहों के प्रभाव के कारण उनके गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के कारण उठती है। लेकिन सुनामी लहरें इन आम लहरों से अलग होती हैं। इसके पीछे कई कारण होते है लेकिन सबसे ज्यादा असरदार कारण है भूकंप । जमीन धसने, ज्वालामुखी विस्फोट, उल्कापात से भी सुनामी आ सकती है।
सुनामी लहरें समुद्र तटीय इलाकों पर भीषण तरीके से हमला करती है जिसमे जान मॉल का भारी नुकसान होता है। भूकंप या सुनामी कि कोई सटीक भविष्यवाणी नही हो सकती, लेकिन सुनामी के अब तक के रिकार्ड और महाद्वीपों कीस्थिति के आधार पर धरती कि जो प्लेट या परतें जहाँ जहाँ मिलती है वहा के आस पास के समुद्र तट में सुनामी का खतरा ज्यादा रहता है। जैसे आस्ट्रेलियाई परत और युरेसियाई परत जहाँ मिलती है वहां इस्थित है सुमात्रा जो कि दूसरी तरफ फिलिपीन परत से जुड़ा हुआ है। सुनामी लहरों का कहर वहां भयंकर रूप से देखा जाता है।
किसी भीषण भूकंप कि वजह से समुद्र कि उपरी परत अचानक खिसक कर आगे सरक जाती है तो समुद्र अपनी समान्तर स्थिति में आगे बढने लगता है। जो लहरें उस वक्त बनती है वो सुनामी लहरें होती हैं। धरती कि उपरी परत फुटबाल कि तरह आपस में जुडी हुई है या एक अंडे कि तरह जिसमे दरारे हो । अंडे का खोल सख्त होता है,लेकिन उसके भीतर का पदार्थ लिजलिजा होता है। भूकंप के असर से ये दरारे चौड़ी होकर अन्दर के पदार्थ में इतनी हलचल पैदा करती है कि वो तेजी से ऊपर कि तरफ का रुख कर लेता है.धरती कि परतें जाब भी किसी असर से चौड़ी होती हैं तो वो खिसकती है जिसके कारण महाद्वीप बनते है तो इस तरह सुनामी लहरें बनती है। लेकिन ये भी जरुरी नही कि हर भूकंप से सुनामी लहरें बने ही, इसके लिए भूकंप का केंद्र समुद्र के आसपास या भीतर होना चाहिए । जब ये सुनामी लहरें किसी भी महाद्वीप कि उस परत के उथले पानी तक पहुंचती है जहाँ से वो दुसरे महाद्वीप से जुड़ा है और जो कि एक दरार के रूप में देखा जा सकता है वहां सुनामी लहर कि तेजी कम हो जाती है।
वह इसलिए क्योकि उस जगह दूसरा महाद्वीप भी जुड़ा रहता है और वहां धरती कि जुडी हुई परत कि वजह से दरार जैसी जो जगह होती है वो पानी को अपने अन्दर रास्ता दे देती है , लेकिन उसके बाद भीतर के पानी के साथ मिलकर जब सुनामी किनारे कि तरफ बढती है तो उसमे इतनी तेजी होती है कि वो ३० मीटर तक ऊपर उठ सकती है और अपने रास्ते में पेड़, जंगल या इमारते कुछ भी हो सबका सफाया कर देती है।

markandey pandey

टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय भाई सुनामी, बाढ़, भूकम्प, अकाल, महामारी. विपत्तियां क्यों आती हैं?
    कहां से आती है? कौन भेजता है? क्या कारण से आती है?
    कोई जानकारी दें।

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