मैकेनिकल कूलिंग सिस्टम और खराब कर रहा है पर्यावरण

गर्मी और उमस में बढ़ रही है 30 से 50 फीसद बिजली की मांग 
सेंटर फॉर साईंस इंवायरमेंट ने मांग किया थर्मल बिल्डिंग नियम बनाएं सरकार 

 प्रचंड गर्मी से बचने के लिए एनसीआर सहित गुडग़ांव में एयर कंडिशनर मशीनों की मांग में तेजी आई है, तो वहीं बिजली की खपत जून माह में ही 30 से 50 फीसदी तक बढ़ गई है। सामान्य दिनों के अनुपात में डेढ़ से दो गुना तक बढ़ी बिजली खपत, और वातानुकूलित मशीनों के प्रयोग से निकलने वाली गर्म हवाएं पर्यावरण को और भी बदतर कर रही है। सेंटर फॉर साईंस एंड इंवायरमेंट ने इसे लेकर सरकार से मांग किया है कि बिल्डिंग कोड के नियमों में परिवर्तन करके मैकेनिकल कूलिंग सिस्टम की जगह थर्मल कूलिंग का प्रावधान किया जाए।
जून माह में जिस तरह बिजली की मांग में तेजी आई है यदि इसके मूल कारणों को नहीं बदला गया तो आने वाले समय में पर्यावरण से लेकर भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ सकता है। केंद्र सरकार की ओर से गठित की गई नेशनल कूलिंग एक्शन प्लान में मांग की गई है कि थर्मल कम्फर्ट स्टैंडर्ड को सभी भवन निर्माणों में लागू किया जाए यहां तक कि इसे किफायती श्रेणी के आवासों सहित प्रधानमंत्री आवास योजना में भी लागू किया जाए। जिससे भवन प्राकृ तिक तौर पर ही कूलिंग सिस्टम को बरकार कर सके और एयर कंडिशनरों की मांग को घटाया जा सके। यदि भवन निर्माण में ढांचागत सुधारों को बढ़ावा नहीं दिया जाता तो बिजली की मांग न केवल एनसीआर और गुडग़ांव में बढेगी बल्कि अनुमान है कि यह देशभर में कुल उत्पादन के 120 गुना अधिक बढ़ जाएगी। अनुमान के अनुसार यदि 2017-18 को आधार वर्ष मान लें तो आगामी एक दशक में वातानूकूलित मशीनों के कारण बिजली की मांग में दो से तीन गुना की बढोत्तरी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
45 से 48 डिग्री तक रहा है तापमान 
जून के महीने में गुडग़ांव और दिल्ली में तापमान लगातार 45 से 48 डिग्री तक रहा है जिसके कारण बिजली खपत में अभूतपूर्व बढोत्तरी हुई है। विज्ञान के अनुसार औसत कमरे का तापमान 25 डिग्री माना जाता है जिसके दोगुना तापमान के कारण लोगों ने जमकर वातानूकूलित मशीनों का प्रयोग किया है। कम लागत और अधिक से अधिक स्पेस के लिए बन रही बहुमंजिला इमारतों में वातावरण के साथ सामंजस्य नहीं है। थर्मल कंफर्ट तरीके से दीवारों के निर्माण से एयर कंडीशनर की जरुरतों को रोका जा सकता है।
एक दिन में 30 किलोवाट एक एयरकंडीशन को चाहिए 
एक एसी यूनिट में दिनभर में 30 किलोवाट बिजली की जरुरत होती है। यदि इसे गुडग़ांव के बिजली बिल के हिसाब से देखा जाए तो महीने में करीब 4 से 5 हजार रुपए का बिल बढ़ जाता है। अनुमान के मुताबिक यदि बिजली के रेट को और कम किया जाता है तो एयरकंडीशन मशीनों में और इजाफा हो सकता है। हांलाकि आबादी का बड़ा हिस्सा अब भी एयरकंडीशनर मशीनों का व्यय नहीं झेल सकता लेकिन वह वातानूकूलित मशीनों की गर्म हवाओं को झेलने के लिए अभिशप्त है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

संसाधन पर बोझ है जेएनयू

चौथी औद्यौगिक क्रांति के लिये हम कितने तैयार हैं

तकनीकी आधारित जॉब में बूम का इंतजार