प्राकृतिक जलस्रोतों पर रोजाना डाल रहे 15 सौ टन कूड़ा

पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट का नासमझी भरा दिया हवाला

राष्ट्रीय पक्षी मोर, नीलगाय सहित वन्यजीव कूड़ा खाकर मरने को विवश
घायल हो रही है अरावली, और वन्यजीव मर रहे हैं। लेकिन वन विभाग को इससे कोई लेना-देना नहीं है। जहरीला कूड़ा खाकर मूक और निर्दोष वन्य जीव मरने को विवश है। जलस्रोतों का खत्म किया जा रहा है लेकिन सरकारी महकमों के शर्म का पानी सूख गया है। वन विभाग अरावली को अपने क्ष्ोत्राधिकार में नहीं मानता और पल्ला झाड़ लेता है तो वहीं क्ष्ोत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग कूड़ा डालने वाले नगर निगम को रश्मी कार्रवाई के लिए नोटिस भ्ोज देने की बात कहता है। दूसरी तरफ रोजाना अरावली की वादियों में 15,०० टन कूड़ा डंप किया जा रहा है जहां प्राकृतिक जलस्रोत बने हुए हैं, उसे भी खत्म किया जा रहा है।
आखिर वन्य जीव कहां जाएं, वह दाना-पानी की तलाश में रिहायशी इलाकों में आते हैं और मॉब लिचिंग की मौत मरते हैं। गत दिनों सोहना इलाकें में कई बार तेदूंओं के आने की खबरें आई है, जो मौत के घाट उतार दिए गए। अरावली क्ष्ोत्र में पहाड़ी गर्तो में प्राकृतिक जल स्रोत बने हुए है जो बरसात के मौसम में भरते हैं, जिनसे वन्यजीव साल के अधिकतर महीनों में अपनी प्यास बुझाते हैं। लेकिन अब इन जलस्रोतों पर कूड़ा डालकर इन्हें नष्ट किया जा रहा है। अब तक कुल 25 लाख टन कचरे को यहां पर डंप किया जा चुका है। अनुमान के मुताबिक अगर नगर निगम इस कचरे को उठाना शुरु करे तो तकरीबन तीन माह से अधिक का वक्त लगेगा।

इस बारे में जब वन विभाग का कहना है कि अरावली क्ष्ोत्र वन विभाग के अंर्तगत नहीं आता। हरियाणा के अरावली फारेस्ट नोटिफिकेशन 199०-92 के अंतर्गत अरावली नहीं आता। यहां तक कि यह प्लाटेंशन क्ष्ोत्र में भी नहीं आता। साथ ही पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट के सेक्शन 4 व 5 के अंर्तगत नहीं आता तो हम कुछ नहीं कर सकते। दूसरी तरफ रोज उजड़ रही अरावली को लेकर क्ष्ोत्रीय प्रदूषण विभाग भी गंभीर नहीं है। उसने यहां बेशुमार कूड़ा-कचरा डंप किए जाने को लेकर नगर निगम को नोटिस भ्ोजने तक ही अपने कर्तव्यों की इतिश्री मान लिया है।
कैसे घायल हो रही है अरावली
रोजाना अवैध खनन, अवैध निर्माण, कूड़ा डंपिंग, अतिक्रमण, अवैध शिकार, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई,सिमटती हरियाली, सूखते जलस्रोत अरावली के लिए सबसे बड़े संकट बने हुए हैं।
कैंसर बन गया है जीनोसाईड
पिछले पांच साल में बंधवाड़ी में 1००-15० लोगों की मौत का कारण कैंसर जैसी बीमारी रही है। पर्यावरण कार्यकताã इसे संस्थागत नरसंहार कहते हैं जो प्रदूषित पेयजल के कारण हो रहा है। कूड़ें के कारण यहां पर भूजल जहरीला हो चुका है और गतदिनों जब यहां के वाटर सैंपल लिए गए तो उसे मानव स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि जानवरों के पीने लायक भी नहीं पाया गया।



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