नहीं रुक रही अरावली में खुदाई



सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद चोरी-छिपे चल रही है खुदाई
सर्वाधिक शिकायतें भोंडसी से आती हैं।
राजधानी दिल्ली का फेफड़ा कहे जाने वाले अरावली  में प्रकृति और वन्य  के साथ खिलवाड़ रुक नहीं रहा है। सबसे प्राचीन समय का कहे जाने वाले अरावली पहाड़ों में खुदाई का काम जारी है। चाहे वह चोरी-छिपे किया जा रहा हो या जिम्मेदार तंत्र की मिलीभगत से किया जा रहा होे लेकिन अरावली को बदस्तूर घायल किया जा रहा है। सबसे अधिक खनन माफिया पत्थरों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर इस क्ष्ोत्र में सक्रिय हैं।
अवैध खनन के लिए भोंडसी, खेड़कीदौला, फरखनगर और बादशाहपुर से सर्वाधिक शिकायते आ रही है, जिन पर रोक लगा पाने में सक्षम तंत्र विफल साबित हो रहा है। हांलाकि वर्ष 2००2 में ही सुप्रीम कोर्ट ने अरावली क्ष्ोत्र में खनन को अवैध घोषित कर दिया था। लेकिन पत्थर तोड़ने वाले स्टोन क्रसर आज भी पत्थर को तोड़ रहे हैं। खासकर गुड़गांव-फरीदाबाद क्ष्ोत्र में पत्थर व्यवसायी करोड़ों का घालमेल करके अरावली पहाड़ियों को चुराते जा रहे हैं। सर्वाधिक मामले भोंडसी क्ष्ोत्र से अवैध खनन का हो रहा है।
अरावली क्ष्ोत्र में हो रहे खनन का सर्वाधिक नुकसान वनक्ष्ोत्र को लेकर बना हुआ है। एक तो एनसीआर खासकर गुड़गांव इलाका हरियाली के लगातार खत्म होने के संकट से जूझ रहा है और प्रदूषण का स्तर उच्चतम अवस्था में बना हुआ है तो वहीं विष्फोट करके पहाड़ों को तोड़ने से वन क्ष्ोत्र भी नष्ट होता जा रहा है। इसी के साथ वन्यजीवों का स्वाभाविक आशियाना भी सिकुड़ता जा रहा है जिसके कारण भी वह रिहायशी इलाकों की ओर लगातार पाए जा रहे हैं।

ग्रामीण भी करते हैं शिकायत
अवैध खनन और वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण भी शिकायत करते आ रहे हैं लेकिन आरोप है कि अवैध खनन करने वालों से मिलीभगत के चलते विभाग के अधिकारी इन शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे अरावली के हालात बदतर हो चले हैं। राजस्थान की सीमा के नजदीक होने के कारण कई तरह के वन्यजीव प्रवास करते अरावली क्ष्ोत्र में आ जाते हैं लेकिन अवैध खनन में तीब्र विष्फोट की आवाज से डर कर वह भाग जाते हैं और उनके प्राकृतिक आवासों के लगातार उजड़ते जाने से वह बेचैन हैं।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

संसाधन पर बोझ है जेएनयू

चौथी औद्यौगिक क्रांति के लिये हम कितने तैयार हैं

तकनीकी आधारित जॉब में बूम का इंतजार