अरावली की निगहबानी के लिए बनेगा स्पेशल टॉस्क फोर्स


अवैध निर्माण, खनन और शिकार से निपटने को मंत्री लगाएंगे सभी अफसरों की क्लास
गत दिनों मोर के पंख और जानवरों की हडिडयों को अरावली में बिखरा पाया गया था
 अब अरावली की वादियों की निगरानी किसी एक विभाग के जिम्मे नहीं होगी बल्कि सबकी जिम्मेदारी होगी। इसके लिए जल्दी ही प्रदेश सरकार के वन व पर्यावरण मंत्री गुड़गांव, फरीदाबाद के संबंधित विभागों को मिलाकर ज्वाईट एक्शन टीम का गठन करेंगे। यह टीम अरावली में अवैध निर्माण, खनन, और शिकारियों पर शिकंजा कसेगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली-एनसीआर के जैविक ढांचे का फेफड़ा कहे जाने वाले अरावली में गत दिनों राष्ट्रीय पक्षी मोर और अन्य जानवरों के अवैध शिकार की शिकायतें मिली थी। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय हरित न्यायालय के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए यहां पेड़ों की अवैध कटाई और निर्माण चोरी-छीपे चलता रहा है।
अरावली को लेकर अधिकारियों के आपसी समन्वय और कारगर रोकथाम के लिए अब खुद वन व पर्यावरण मंत्री राव नरवीर संबंधित जिले के अधिकारियों के साथ बैठक करके संयुक्त टास्क फोर्स का गठन करेंगे। अरावली का अध्ययन करने वाली एक संस्था के साथ मुलाकात में मंत्री ने अपने एक्शन प्लान का खुलासा किया है। उ“ेखनीय है कि आए दिन अरावली में जानवरों की हडिडयां और अवश्ोष प्रा’ होते हैं। इसके अलावा क्ष्ोत्र में शिकारियों का आवागमन रोजाना ही देखा जाता है। पशु-पक्षी प्रेमी और आसपास के निवासी इसके लिए सीध्ो प्रशासन को दोषी ठहराते हैं। दिसंबर 9 को बादशाहपुर पुलिस थाने में गुड़गांव के एक निवासी ने इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई थी।
टास्क फोर्स कौन से कदम उठाएगा
-24 घंटे टीमें करेंगी अरावली की पेटàोलिंग और सर्विलियांस
-माचã 2०17 में बंद की गई 2० चेकिंग पोस्ट को फिर से चालू किया जाएगा
-जिन प्रजातियों के वृक्ष अरावली क्ष्ोत्र से काटे गए हैं उनका फिर से रोपण होगा
-अरावली क्ष्ोत्र के गढडे जो सूखें है उनमें जलभराव किया जाएगा
-वनरक्षकों (फारेस्ट गार्ड)की संख्या में बढोत्तरी की जाएगी
अगले एक दशक में एनसीआर में हो सकता है जलसंकट
पर्यावरण विश्ोषज्ञों का कहना है कि जिस तेजी से अरावली क्ष्ोत्र में वनों की कटाई और अवैध निर्माण हो रहा है उससे अंडरग्राउंड वाटर रिचार्ज करने की प्रक्रिया बेहद धीमी पड़ती जा रही है। सिर्फ गुड़गांव ही नहीं बल्कि पूरे एनसीआर के भूमिगत जल संसाधन को रिचार्ज करने में अरावली क्ष्ोत्र की अहम भूमिका है। उल्लेखनीय है कि गुड़गांव-फरीदाबाद क्ष्ोत्र को केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की ओर से पहले ही डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। ऐसे में तेजी से कट रहे पेड़ महज एक दशक बाद ही एनसीआर के लिए जल संकट के साथ ही भूकंप के भी खतरे को बढ़ा देंगे।
कितना बचा है वनक्ष्ोत्र 
राज्य के कुल 13 जिलों में अरावली के 39,5०० हेक्टेयर भूमि में से तीस हजार हेक्टेयर भूमि पर सवा तीन करोड़ पौध्ो लगाए गए थ्ो। लेकिन गत दस सालों में देखा जाए तो गुड़गांव क्ष्ोत्र में विभिन्न कारणों से आठ फीसदी से अधिक हरियाली खत्म हो चुकी है। वन विभाग के रिकार्ड के अनुसार 1,6०० हेक्टेयर क्ष्ोत्र वनाच्छादित है जिसमें शहरी क्ष्ोत्र में मात्र दो फीसद है। भारतीय वनक्ष्ोत्र सर्वेक्षण की रिर्पोट के अनुसार हरियाणा के कुल 3.9 वनक्ष्ोत्र में सिर्फ 2.9 फीसदी ही वनाच्छादित पाया गया है। जबकि डेढ़ दशक पहले ही तकरीबन सवा तीन करोड़ पौधारोपड़ अरावली के 3० हजार हेक्टेयर भूमि पर किया गया था।
वर्जन
अरावली को बचाने के लिए हमलोग लगातार प्रयासरत है। इसके लिए प्रदेश सरकार से मिलकर कार्ययोजना प्रस्तुत की गई है। विश्ोषज्ञों की टीम इसका अध्ययन भी कर रही है। हमने सरकार को कुछ सुझाव दिया है जिसपर विचार हो रहा है -शिवानी, एडब्लूबीआई अधिकारी।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

संसाधन पर बोझ है जेएनयू

चौथी औद्यौगिक क्रांति के लिये हम कितने तैयार हैं

तकनीकी आधारित जॉब में बूम का इंतजार