सरकारी दीमक निगल गए अरावलीेकी हरियाली


गत दिनों सरकारी नुमाईदें ने एनजीटी को दिया था जबाव 
हर गांव पेड़ की छांव, घर-घर हरियाली सिर्फ नारा न रह जाए

मानूसन की आवक के साथ ही भाजपा की सरकारों ने अपने-अपने राज्यों में वृक्षारोपण का कार्यक्रम शुरु किया है। इसी क्रम में हरियाणा में भी सरकार और पार्टी के कार्यकताã वृक्षारोपण कार्यक्रम कर रहे हैं। गत वर्ष भी मेगा वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया गया था लेकिन वह अभियान बरसात खत्म होते ही मुरझा गया।
गत स’ाह एनसीआर का फेफड़ा कहे जाने वाले अरावली की हरियाली को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायालय ने सरकार से पूछा था कि अरावली के पेड़ रातों-रात कहां गायब हो जाते हैं? तो सरकार की ओर से दाखिल जबाव में कहा गया कि दीमक ही पेड़ों को नष्ट कर रहे हैं।
गुड़गांव और फरीदाबाद के अरावली प्रेमी सवाल करते हैं कि हरियाली के नाम पर लगाए गए पौध्ो आखिर कहां गायब हो जाते हैं? गत डेढ़ दशक पहले तकरीबन 175 करोड़ रुपए खर्च करके लगाए गए पौध्ो कहां गुम हो गए? राज्य में लगातार घटते वनक्ष्ोत्र को लेकर एनजीटी भी लगातार चिंता प्रगट करता रहता है। सिर्फ गुड़गांव में पौधारोपड़, हरियाली, ग्रीन कारिडोर, ग्रीन लंग्स आदि के जुमलों से बड़े-बड़े अभियानों की घोषणा होती है, लेकिन न तो कहीं पौध्ो दिखाई देते हैं ना ही हरियाली दिखाई देती है। बल्कि अरावली की लगातार नष्ट होती हरियाली को लेकर लोगों में निराशा और गुस्सा भरा है।
कितना बचा है वन
भारतीय वन सर्वेक्षण की रिर्पोट के अनुसार हरियाणा के कुल 3.9 वनक्ष्ोत्र में सिर्फ 2.9 फीसदी ही वनाच्छादित पाया गया है। जबकि डेढ़ दशक पहले ही तकरीबन सवा तीन करोड़ पौधारोपड़ अरावली के 3० हजार हेक्टेयर भूमि पर किया गया था। राज्य के कुल 13 जिलों में अरावली के 39,5०० हेक्टेयर भूमि में से तीस हजार हेक्टेयर भूमि पर सवा तीन करोड़ पौध्ो लगाए गए थ्ो। लेकिन गत दस सालों में देखा जाए तो गुड़गांव क्ष्ोत्र में विभिन्न कारणों से आठ फीसदी हरियाली का नुकसान हुआ है। वन विभाग के रिकार्ड के अनुसार 1,6०० हेक्टेयर क्ष्ोत्र वनाच्छादित है जिसमें शहरी क्ष्ोत्र में मात्र दो फीसद है।
गैरसरकारी संस्था 1० हजार पेड़ और 19० हैक्टेयर का शहरी वन कहां है
गत वर्ष सरकार के सहयोग से गैर सरकारी संस्थाओं ने मानसून के दौरान ही 1० हजार पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा था आखिर वे पौध्ो कहां मुरझा गए? जिला में वन विभाग द्बारा लगभग 19० हैक्टेयर भूमि पर अरावली पर्वत श्रृंखला में शहरी वन विकसित करने की योजना थी, जो कहीं भी दिखाई नहीं देती। योजना के प्रथम चरण में लगभग 58 हैक्टेयर भूमि पर गांव सिकंदरपुर घोसी में शहरी वन विकसित करना था।
चंद्रश्ोखर स्मृति वन भी न बने दिखावा 
गत दिनों केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ हर्षवर्धन और मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने संयुक्त रुप से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अरावली से लगाव को लेकर चंद्रशेखर स्मृति वन बनाए जाने की शुरुआत की है। इसके माध्यम से सरकार की इच्छा है कि क्ष्ोत्र में वनटूरिज्म को बढावा दिया जाए। इसके लिए लोगों से आहवान किया जा रहा है कि हर गांव पेड़ की छांव और घर- घर हरियाली लेकिन यह कैसे होगा साकार?

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